भारतकोश
सिद्धसिद्धान्तपद्धति (गुरु गोरखनाथ - पिण्ड-उत्पत्ति, पिण्ड-विचार एवं ब्रह्माण्ड-एकात्म दर्शन)

सिद्धसिद्धान्तपद्धति (गुरु गोरखनाथ - पिण्ड-उत्पत्ति, पिण्ड-विचार एवं ब्रह्माण्ड-एकात्म दर्शन)

Siddha Siddhanta Paddhati of Guru Gorakhnath with Commentary

गुरु गोरखनाथ (सम्पादक: गोरक्षनाथ मन्दिर शोध संस्थान, गोरखपुर) द्वारा

DevanagariHindipublished222 पृष्ठ

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एतच्छास्त्रं महादिव्य रहस्यं पारमेश्वरम् । सिद्धान्तं सर्वसारञ्च नानासंकेतनिर्णयम् ॥ सिद्धाना प्रकट सिद्धं सद्यः प्रत्ययकारकम् । आत्मानन्दकरं नित्यं सर्वसन्देहनाशनम् ॥ ( सिद्धसिद्धान्तपद्धति ६ । ६७-६८ ) यद्यपि सिद्धसिद्धान्तपद्धति में योग के दार्शनिक पक्ष का प्रतिपादन ही विशेष रूप से परिलक्षित है तथापि साधनासम्वन्धी सूक्ष्मातिसूक्ष्म प्रकियात्मक रहस्यों के अनुभवपूर्ण विवेचन से भी यह सर्वथा सम्पन्न है । यह हमारे नाथयोग का अद्भूत वाङमय है । हमारे मन में कई वर्षों पहले यह संकल्प उदित हुआ था कि इसका शुद्ध संस्कृतपाठसहित हिन्दी में सहज सुबोध भाष्य की प्रस्तुतिपूर्वक प्रकाशन हो । हमारी इच्छा थी कि हमारे गोरक्षसिद्धयोगपीठ से इस तरह का लोकप्रिय संस्करण नाथयोग के सत्सिद्धान्तों के प्रचार-प्रसार में सहायक हो । श्रीगोरखनाथ मन्दिर, गोरखपुर से प्रकाशित होने वाले "योगवाणी" मासिक के सम्पादक रामलालजी श्रीवास्तव ने हिन्दी में सहज-सुबोध भाष्य प्रस्तुत कर 'सिद्ध- सिद्धान्तपद्धति' की यौगिक गरिमा ही नहीं बढ़ायी, हमारी इच्छा और पवित्र संकल्प की पूर्ति में भी अपनी महनीय भूमिका निवाही है । उनके अनुभवपूर्ण मार्मिक भाष्य से 'सिद्धसिद्धान्तपद्धति' को समझने में योगसाधकों को बड़ी सुगमता होगी । हम इस कार्य के लिये उन्हें हृदय से आशीर्वाद प्रदान करते हैं । शिवगोरक्ष भगवान् गोरखनाथजी ने 'सिद्धसिद्धान्तपद्धति' के रूप में अद्भुत योगशास्त्र प्रदान किया और इसका सूक्ष्म रहस्य उनके चरणाश्रय से ही समझ में आ सकता है । हम उन्हीं के मांगलिक वचन ( सि० सि० प० ६ । ११५ ) के प्रकाशन में बड़े आत्मविश्वास से यह कहने का साहस करते हैं कि योगसाधकों-भक्तों पर अनुग्रह- स्वरूप परमानन्ददायक गणपतिनाम का तेज सिद्धसिद्धान्त के प्रकाश से प्राणीमात्र की चेतना को आलोकित करे । विद्वात्वर्थनिचयं भक्तानुग्रहमूर्त्तिमत् । स्मरानन्दभरं चेतो गाणपत्यभिधं महः । गोरखनाथ-मन्दिर, गोरखपुर महन्त अवेद्यनाथ विजयादशमी २०३८ वि० (गोरक्षपीठाधीश्वर) १६ ]