सिद्धसिद्धान्तपद्धति (गुरु गोरखनाथ - पिण्ड-उत्पत्ति, पिण्ड-विचार एवं ब्रह्माण्ड-एकात्म दर्शन)
Siddha Siddhanta Paddhati of Guru Gorakhnath with Commentary
गुरु गोरखनाथ (सम्पादक: गोरक्षनाथ मन्दिर शोध संस्थान, गोरखपुर) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( परिणामशक्ति ) है और पाँचवां गुण नित्यसुखत्व ( स्वरूप में सुखानुभव की शक्ति ) है ॥ २६ ॥ उदय उल्लासोऽवभासो विकासः प्रभा इति पंचगुणः प्रबोधः ॥ २७ ॥ प्रबोध के पाँच गुण हैं। पहला गुण उदय ( उत्पत्ति ) है, दूसरा गुण उल्लास ( चित्त की प्रफुल्लता ) है, तीसरा गुण अवभास ( ज्ञान ) है, चौथा गुण विकास ( विकसित-अभिव्यक्त होना ) है और पाँचवां गुण प्रभा ( तेज अथवा स्वरूप-प्रकाश ) है ॥ २७ ॥ सद्भावो विचारः कर्तृत्वं ज्ञातृत्वं स्वतन्त्रत्वमिति पंचगुणाश्चिदुदयः ॥ २८ ॥ चिदुदय के पाँच गुण हैं। पहला गुण सद्भाव (सनातनता, नित्यता) है। दूसरा गुण विचार ( नित्य-अनित्य वस्तु का विवेक ) है। तीसरा गुण कर्तृत्व ( कर्तापन का स्वभाव ) है। चौथा गुण ज्ञातृत्व ( जानने का स्वभाव ) है। पाँचवां गुण स्वतन्त्रत्व ( अद्वय, अनुपम, स्वाश्रयी अथवा स्वाभिव्यक्त रहना ) है ॥ २८ ॥ निर्विकारत्वं निष्कलत्वं निर्विकल्पत्वं समता विश्रान्ति- रिति पञ्चगुणाः चित्प्रकाशः ॥ २६ ॥ चित्प्रकाश ( देव ) के पाँच गुण हैं। पहला गुण निर्विकारत्व ( उत्पत्ति, वृद्धि आदि विकारों का अभाव ) है। दूसरा गुण निष्कलत्व ( अवयव आदि न होना ) है। तीसरा गुण निर्विकल्पत्व ( संशयरहितता ) है । चौथा गुण समता ( सर्वत्र एकरूपता अथवा एकरस व्याप्त रहना ) है। पाँचवां गुण विश्रान्ति ( निर्विषयता अथवा विषयों से उपरामता ) है ॥ २६ ॥ अहन्ताऽखण्डैश्वर्यं स्वात्मता विश्वानुभवसामर्थ्यं सर्वज्ञ- त्वमिति पञ्चगुणाः सोऽहंभावः । इत्याद्यपिण्डस्य पञ्चतत्त्वं पञ्चविंशति गुणाः । परमानन्दः प्रबोधश्चिदुदयश्चित्प्रकाशः सोऽहंभाव इत्यन्त आद्यपिण्डो महातत्त्वयुक्तः समुत्थितः ॥ ३० ॥ सिद्धसिद्धान्तपद्धति ] [ ११