सिद्धसिद्धान्तपद्धति (गुरु गोरखनाथ - पिण्ड-उत्पत्ति, पिण्ड-विचार एवं ब्रह्माण्ड-एकात्म दर्शन)
Siddha Siddhanta Paddhati of Guru Gorakhnath with Commentary
गुरु गोरखनाथ (सम्पादक: गोरक्षनाथ मन्दिर शोध संस्थान, गोरखपुर) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअदाह्यत्वं (आन्तरिक आध्यात्मिक, आधिदैविक और आधिभौतिक त्रिविध ताप अतीतता) है। यही अनादि पिण्ड पञ्चतत्वात्मक सदाशिवादि (अपरम्पदादि) के पचीस गुण अथवा धर्म का निरूपण है ॥ २३ ॥ उक्तञ्च । अपरम्परं, परमपदं, शून्यं, निरञ्जनपर- मात्मानौ, पञ्चभिरेतैः सगुणैरनाद्यपिण्डः समुत्पन्नः ॥ २४ ॥ महाप्रलय में समस्त जगत् महाशक्ति में लय को प्राप्त होकर विलीन रहता है । चिद्रूपा महाशक्ति भी चिद्रूप परमेश्वर से अभिन्न रहती है । सृष्टि की रचना के समय पाँच-पाँच गुणों से युक्त पाँच महाशक्तियों का प्राकट्य होता है, ( वे (पाँच- पाँच देवों से) पृथक्-पृथक् (कार्य-भेद से) युक्त होती हैं । ) ये ही पाँच देव--शक्तियों के अनुरूप अपरम्पर, परमपद, शून्य, निरञ्जन और परमात्मा हैं—, इन सभी पाँच प्रधान महाशक्तियों के सहित चेतन का नाम ही अनाद्य पिण्ड है । यही सच्चिदानन्दघनस्वरूप परमेश्वर ही उपर्युक्त गुण और नाम से पाँच रूपों में स्वाकारित—अभिव्यक्त होता है । यह स्वरूपाभिव्यक्त समष्टिदेव ही परमेश्वर शिव हैं, आदिनाथ हैं ॥ २४ ॥ महासाकार आद्यपिण्ड पुरुष की उत्पत्ति, उसके पाँच तत्व और पचीस गुण अनाद्यात् परमानन्दः परमानन्दात् प्रबोधः प्रबोधाच्चिदु- दयश्चिदुदयाच्चित्प्रकाशः चित्प्रकाशात् सोऽहं भावः ॥ २५ ॥ ( अनाद्यपिण्ड परमेश्वर से आद्यपिण्ड पुरुष की अभिव्यक्ति का वर्णन है । ) अनाद्य पिण्ड से परमानन्द, परमानन्द से प्रबोध, प्रबोधसेचिदुदय, चिदुदय से चित्प्रकाश और चित्प्रकाश से अहं भाव उत्पन्न—रूपाभिव्यक्त हैं ॥ २५ ॥ विशेष--इस आद्य पुरुष परमेश्वर के भी पाँच-पाँच गुणों से विशिष्ट युक्त पाँच देवों के निरूपण-क्रम में महातत्वगत पंचभूतबीजोत्पत्ति का प्रतिपादन है । स्पन्दो हर्ष उत्साहो निष्पन्दो नित्यसुखत्वमिति पंचगुणाः परमानन्दः ॥ २६ ॥ परमानन्द के पाँच गुण हैं। पहला गुण स्पन्द ( चलन-शक्ति ) है, दूसरा गुण हर्ष ( आनन्द ) है, तीसरा गुण उत्साह ( कृतिशक्ति ) है, चौथा गुण निष्पन्द १० ] [ सिद्धसिद्धान्तपद्धति