भारतकोश
सिद्धसिद्धान्तपद्धति (गुरु गोरखनाथ - पिण्ड-उत्पत्ति, पिण्ड-विचार एवं ब्रह्माण्ड-एकात्म दर्शन)

सिद्धसिद्धान्तपद्धति (गुरु गोरखनाथ - पिण्ड-उत्पत्ति, पिण्ड-विचार एवं ब्रह्माण्ड-एकात्म दर्शन)

Siddha Siddhanta Paddhati of Guru Gorakhnath with Commentary

गुरु गोरखनाथ (सम्पादक: गोरक्षनाथ मन्दिर शोध संस्थान, गोरखपुर) द्वारा

DevanagariHindipublished222 पृष्ठ

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परमपद ( परमेश्वर ) निष्कल ( अवयवशून्य निराकार ), अणु-से-भी अणु ( सूक्ष्म ), अचल ( व्यापक ), असंख्य ( अद्वय ) और निराधार ( आधार- रहित, स्वाश्रित अथवा स्वाभिव्यक्त ) है । ये ही परमेश्वर परमपद के पाँचगुण हैं ॥ २० ॥ लीनता, पूर्णतोन्मनी, लोलता, मूर्च्छतेति पञ्चगुणं शून्यम् ॥ २१ ॥ शून्य ( रुद्र ) के पाँच गुण-धर्म हैं । पहला गुण लीनता ( अव्यक्तावस्था ) है -, कारण में कार्य का लय ही लीनता है । दूसग गुण पूर्णता ( सर्वव्यापकता, अखण्डता ) है । तीसरागुण उन्मनी ( सहज स्वरूप में प्रतिष्ठा ) है, चौथागुण लोलता ( संहार आदि कार्यसम्पादन में तरलता ) है और पाँचवां गुण मूर्च्छा ( महाप्रलय में एकरसात्मक भावापन्नता, विलीनता ) है ॥ २१ ॥ सत्यत्वं सहजत्वं समरसत्वं सावधानत्वं सर्वगतत्वमिति पञ्च- गुणंनिरञ्जनम् ॥ २२ ॥ निरञ्जन ( रागद्वेषादि से रहित-द्वन्द्वातीत विष्णु ) पाँचगुणों से युक्त है । पहला गुण सत्यत्व ( तीनों काल में अकाल रूप से उत्पत्ति-विनाश से परे सच्चिदानन्दस्वरूपत्व ) है । दूसरा गुण सहजत्व ( स्वरूपस्थता ) है, तीसरा गुण समरसता ( निर्विकारता ) है, चौथा गुण सावधानता ( प्रमादादिदोष- रहितता ) है और पाँचवां गुण सर्वगतत्व ( सर्वव्यापकत्व ) है ॥ २२ ॥ अक्षयत्वमभेद्यत्वमच्छेद्यत्वमविनाशित्वमदाह्यत्वमिति पञ्च- गुणाः परमात्मा । इत्यनादिपिण्डस्य पञ्चतत्वं पञ्चविंशति गुणाः ॥ २३ ॥ परमात्मा (ब्रह्मा:सृष्टिकर्ता) के पाँच गुण हैं । पहला गुण अक्षयत्व (संसाररूप उपाधि के क्षय होने पर भी स्वरूप की अक्षयता-सत्ता) है । दूसरा गुण अभेद्यता (अनेक उपाधिगत भेद रहने पर भी स्वरूप में अभेद रहना) है, तीसरा गुण अच्छेद्यता ( शाश्वत-सनातन सत्ता में अधिष्ठता ) है, चौथा गुण अविनाशित्व (उत्पत्ति-विनाश के अभाव में स्वाभिव्यक्तता) है और पाँचवां गुण सिद्धसिद्धान्तपद्धति ] [ ६