सिद्धसिद्धान्तपद्धति (गुरु गोरखनाथ - पिण्ड-उत्पत्ति, पिण्ड-विचार एवं ब्रह्माण्ड-एकात्म दर्शन)
Siddha Siddhanta Paddhati of Guru Gorakhnath with Commentary
गुरु गोरखनाथ (सम्पादक: गोरक्षनाथ मन्दिर शोध संस्थान, गोरखपुर) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंसार्धत्रयकोटिरोमकूपाणि पितृमातृवीर्यं भवति वातपित्तश्लेष्म- धातुत्रयं दशधातुमयं शरीरमिति गर्भोत्थपिण्डोत्पत्तिः ॥ ७३ ॥ ( जीवात्मा के स्थूल शरीर में कितनी मात्रा में कौन-कौन धातु हैं, इसका वर्णन किया गया है । ) इस शरीर में वीर्य साढ़े तीन पल ( २२५ ग्राम ), रक्त बीस पल (१२८० ग्राम), मेद बारह पल ( ७६८ ग्राम ), मज्जा, दस पल (६४० ग्राम), मांस सौ पल (६४०० ग्राम), पित्त दस पल (६४० ग्राम), कफ २० पल ( १२८० ग्राम ), वात बीस पल (१२८० ग्राम), अस्थि तीन सौ साठ, सन्धि (जोड़) तीन सौ साठ, रोम और रोमकूप साढ़े तीन करोड़ हैं । यह शरीर पिता-माता के वीर्य और रज से उत्पन्न है । वात, पित्त, कफ आदि से युक्त दस धातुओं से निर्मित शरीर की गर्भ से उत्पत्ति होती है । यह गर्भ में उत्थित पिण्ड की उत्पत्ति है ॥ ७३ ॥ विशेष--१ पल ४ कर्ष के बराबर होता है, और १ कर्ष का तौल १६ मासा है, १ मासा १ ग्राम के तौल के बराबर होता है, इस तरह १ पल का तौल ६४ ग्राम है । इति शिवगोरक्षविरचितसिद्धसिद्धान्तपद्धतौ प्रथमोपदेशः ॥ ३२ ] [ सिद्ध सिद्धान्तपद्धति