भारतकोश
सिद्धान्तशिरोमणि: गोलाध्याय (भास्कराचार्य - मरीचि भाष्य एवं पं. केदारदत्त जोशी सविस्तार व्याख्या)

सिद्धान्तशिरोमणि: गोलाध्याय (भास्कराचार्य - मरीचि भाष्य एवं पं. केदारदत्त जोशी सविस्तार व्याख्या)

Siddhanta Shiromani Goladhyaya with Marichi Commentary

भास्कराचार्य द्वितीय (भाष्यकार: मुनीश्वर / केदारदत्त जोशी) द्वारा

DevanagariHindipublished723 पृष्ठ

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९२ गोलाध्याये भूगर्भविन्दु केन्द्र से ध्रुवाभिमुख सूत्र का नाम ध्रुव सूत्र होता है। ध्रुव सूत्र के अन्त में पृथ्वी में आकाशीय ध्रुव का स्थान होने से उस बिन्दु पर, ध्रुव तारा शिर के ठीक ऊपर होने से भूनिष्ठ उस बिन्दु का नाम ध्रुव स्थान कहा जाता है क्योंकि वहाँ पर उत्तर या दक्षिण ध्रुवगत सूत्र को आकाश में वर्धमान करने से उत्तर ध्रुव स्थान के खमध्य में उत्तर ध्रुव एवं दक्षिण ध्रुव को तत्रस्थ जन समाज शिर के ऊपर ध्रुव को देखता है। अतएव उत्तर ध्रुवस्थ दृष्टा को दक्षिण ध्रुवाभिमुखीय दृष्टि एवं दक्षिण ध्रुवस्थ मानव की उत्तर ध्रुवाभिमुखीय दृष्टि वशेन नक्षत्र मण्डल दाहिने और बायें भ्रमणशील दृष्टिपथ में आते हैं देखें भी जाते हैं। जो प्रत्यक्ष सिद्ध है। योजन माप में पृथ्वी की परिधि ४९६७ योजन है और पृथ्वी का व्यास १५८१ १/२४ योजन कहा गया है। पृथ्वी का पृष्ठफल ७८५३०३४ जो जाल से ढके हुये किसी फुटबौल के पृष्ठ फल की तरह परिधि गुणित व्यास के तुल्य होता है। उपपत्तिः—प्राचीन आचार्यों ने किसी भी वृत्त की परिधि के ३६० अंशों में अर्थात् ३६० × ६० = २१६०० कलाओं में व्यास का मान ६८७६ कला माना है। अतः त्रैराशिक गणित से १ कला व्यास परिधि का मान २१६०० × १ = ————— होता है। ६८७६ हर भाज्य को किसी बड़े अंक से गुणा भाग अर्थात् १० हजार से देने पर एक स्वरूप अविकृत होने से १ कलागत परिधि का मान २१६००० × १ × १०००० १८०० × १२५० = ————————— = ——————— ६८७६ × १०००० ५७३ × १२५० २२५०००० ३९२७ × १ = —————— = ———— इस प्रकार ५७३ × १२५० १२५० ३९२७ × इष्ट व्यास इष्ट व्यास में परिधि का मान = ——————— सिद्ध होता है। १२५० १७७ १ अथवा स्वरूपान्तर से इष्ट व्यास × ( ३ ———— ) = ( ३ + — ) × इष्ट व्यास १२५० ७ स्वल्पान्तर से परिधि मान सिद्ध होता है। आचार्य का भूव्यास का मान और भूव्यासादि ज्ञान गणित— भास्कराचार्य ने अपनी अंकगणित की लीलावती नाम की पोथी के (१ अंगुल = ८ यवोदर, २४ अंगुल = १ हाथ, ४ हाथ = १ दण्ड, और २००० दण्ड = १ क्रोश तथा ४ क्रोश = १ योजन,) परिभाषा प्रकरण में एक स्थान से अन्यस्थानान्तर को मापने का मापदण्ड बताया है।