भारतकोश
सिद्धान्तशिरोमणि: गोलाध्याय (भास्कराचार्य - मरीचि भाष्य एवं पं. केदारदत्त जोशी सविस्तार व्याख्या)

सिद्धान्तशिरोमणि: गोलाध्याय (भास्कराचार्य - मरीचि भाष्य एवं पं. केदारदत्त जोशी सविस्तार व्याख्या)

Siddhanta Shiromani Goladhyaya with Marichi Commentary

भास्कराचार्य द्वितीय (भाष्यकार: मुनीश्वर / केदारदत्त जोशी) द्वारा

DevanagariHindipublished723 पृष्ठ

पृष्ठ 198, कुल 723 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 198

व्यास २" in Line 3? Look at Line 3: व्यास २ ११ ११ Wait, look under "व्यास २": There is "७"! Wait, where is "७"? Is "७" on Line 4? Line 4 has: ७ व्यास १ व्यास ११ Wait! Look at the alignment: Under "पूर्वपरिध्यर्धरूपं व्यासः ११": There is "व्यास २" and under it "७"? Wait, no! "व्यास २" is under "व्यासः ११"? No, look at "व्यास २": It is at the left! Wait, why is it at the left? Because above it is: Line 1: क्षेत्रे परिधिगुणितव्यासपादः फलमिति गोलवृत्तक्षेत्रपरिधिस्वरूपं १२ । अथ वस्त्रफलार्थं? Wait, look at the image carefully! Let's trace: Line A: क्षेत्रे परिधिगुणितव्यासपादः फलमिति गोलवृत्तक्षेत्रपरिधिस्वरूपं १२ । अथ वस्त्रफलार्थं Wait, look at the word: "गोलवृत्तक्षेत्र" then is it "परिधिस्वरूपं"? Wait! It has "प-रि-धि-स्व-रू-पं"! Wait, does it really say "परिधिस्वरूपं"? Look at the loop: प, then र with ि (रि), then ध with ि (धि),