सिद्धान्तशिरोमणि: गोलाध्याय (भास्कराचार्य - मरीचि भाष्य एवं पं. केदारदत्त जोशी सविस्तार व्याख्या)
Siddhanta Shiromani Goladhyaya with Marichi Commentary
भास्कराचार्य द्वितीय (भाष्यकार: मुनीश्वर / केदारदत्त जोशी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंव्यास २" in Line 3?
Look at Line 3:
व्यास २ ११ ११
Wait, look under "व्यास २":
There is "७"!
Wait, where is "७"? Is "७" on Line 4?
Line 4 has:
७ व्यास १ व्यास ११
Wait! Look at the alignment:
Under "पूर्वपरिध्यर्धरूपं व्यासः ११":
There is "व्यास २" and under it "७"?
Wait, no! "व्यास २" is under "व्यासः ११"?
No, look at "व्यास २":
It is at the left!
Wait, why is it at the left?
Because above it is:
Line 1: क्षेत्रे परिधिगुणितव्यासपादः फलमिति गोलवृत्तक्षेत्रपरिधिस्वरूपं १२ । अथ वस्त्रफलार्थं?
Wait, look at the image carefully!
Let's trace:
Line A: क्षेत्रे परिधिगुणितव्यासपादः फलमिति गोलवृत्तक्षेत्रपरिधिस्वरूपं १२ । अथ वस्त्रफलार्थं
Wait, look at the word: "गोलवृत्तक्षेत्र" then is it "परिधिस्वरूपं"?
Wait! It has "प-रि-धि-स्व-रू-पं"!
Wait, does it really say "परिधिस्वरूपं"?
Look at the loop: प, then र with ि (रि), then ध with ि (धि),