सिद्धान्तशिरोमणि: गोलाध्याय (भास्कराचार्य - मरीचि भाष्य एवं पं. केदारदत्त जोशी सविस्तार व्याख्या)
Siddhanta Shiromani Goladhyaya with Marichi Commentary
भास्कराचार्य द्वितीय (भाष्यकार: मुनीश्वर / केदारदत्त जोशी) द्वारा
पृष्ठ 206, कुल 723 में से
संदर्भ में पढ़ें१०४ गोलाध्याये त्रि सर्वज्यैक्य - ---- सभी का योग = २
त्रि
२ इस प्रकार सर्वज्यैक्य = ५४२३३ में त्रिज्यार्ध = १७१९ (त्रिज्या = ३४३८) कम करने में ५२५१४ होता है। ५२५१४ में त्रिज्यार्ध १७१९ से भाग देने से ३० । ३३ = व्यास के तुल्य एक वलय का क्षेत्रफल स्पष्ट है। पूर्व में जिस गोल की परिधि एक एक हाथ के माप से ९६ हाथ मापी गई है उस वृत्त का व्यासमान “व्यासे भनन्दाग्निहते विभक्ते खवाणसूर्यौ” से परिधि ३०।३३ × ३९२७ = ----------------- = ९६ हाथ के तुल्य होती है। १२५० गोल में वप्रक्षेत्रों की संख्या एक एक हाथ दूरी पर के वलय क्षेत्रों की संख्या = ९६ मानी गई है। एक वलय क्षेत्रफल = व्यास अतः सम्पूर्ण वलयों के क्षेत्रफलों का मान = व्यास × परिधि के तुल्य स्पष्ट आचार्य ने लोलावती ग्रन्थ में और वृत्तफल, गोल- पृष्ठ फल एवं गोल घनफल साधन का सही प्रकार भी दिया है। जैसे— वृत्त परिधि की सूक्ष्म एक बड़ी महत्तमाङ्क संख्या = स, वृत्त परिधि = प मानने से प वृत्त के एक सूक्ष्म विभाग का मान --- होगा। स संख्यक त्रिभुजों में प्रत्येक का क्षेत्र- स प × त्रि प व्यास परिधि × व्यास फल = --------- = ---- × ----- = --------------- वृत्त में एक त्रिभुज के क्षेत्रफल २ स २ स २ ४ स (परिधि × व्यास) × स परिधि × व्यास को स संख्या से गुणा करने से -------------------- = ------------- = वृत्त का क्षेत्र- ४ × स ४ परिधि × व्यास × ४ फल। अतः गोल पृष्ठफल = ----------------- = परिधि × व्यास के तुल्य गोलपृष्ठ- ४ फल सिद्ध होता है। यदि किसी गोल के सूक्ष्माति सूक्ष्म स संख्यक विभागों में एक विभाग का मान = पृष्ठफल स। स संख्या से गोल पृष्ठ फल में भाग देने से ------- = एक विभाग का मान। गोल स केन्द्र से “स” संख्यक प्रति विभाग तक गई रेखा का मान = त्रिज्या। इस प्रकार “स” संख्या पृष्ठफल तुल्य सूची क्षेत्र संख्या होती है। अतः एक सूची क्षेत्र का क्षेत्रफल = ------- × स व्यास पृष्ठफल × स व्यास ------ । अतः “स” संख्यक समग्र सूची क्षेत्रों का क्षेत्रफल = ------------- × ------- २ स २