भारतकोश
सिद्धान्तशिरोमणि: गोलाध्याय (भास्कराचार्य - मरीचि भाष्य एवं पं. केदारदत्त जोशी सविस्तार व्याख्या)

सिद्धान्तशिरोमणि: गोलाध्याय (भास्कराचार्य - मरीचि भाष्य एवं पं. केदारदत्त जोशी सविस्तार व्याख्या)

Siddhanta Shiromani Goladhyaya with Marichi Commentary

भास्कराचार्य द्वितीय (भाष्यकार: मुनीश्वर / केदारदत्त जोशी) द्वारा

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यनारम्भे" -> क-दा-चि-द-न्य-दि-ङ्न-य-ना-र-म्भे Wait, "दिङ्नयनारम्भे" or "दिङ्नयनारम्भे"? दिश् + नयन = दिङ्नयन (carrying to another direction). Letters: दि, ङ्न (ङ with conjunct न: ङ्न), य, न, ना, र, म्भे. Yes, दिङ्नयनारम्भे! Next: नियामकैरिच्छावशादायसनिर्मितहलप्रक्षेपेण (niyāmakair icchā-vaśād āyasa-nirmita-hala-prakṣepeṇa) - using an iron anchor/plough.

Let's check line 23: "तरिस्थिरीकरणे वेगप्रतिबन्धादेव नयनासामर्थ्यम् । यत्र चाऽऽधाराधेयभावस्थले बलाहकादा-" Line 24 start: "वरुन्धतीवसिष्ठादौ चासमानयोरपि साम्येनैव प्रचालनस्यादृष्टत्वाद्वेगप्रतिबन्धासमर्थत्वमेव ।" Look at line 23 end: "बलाहकादा-" Line 24 start: "वरुन्धती..." Together: बलाहकादावरुन्धती... = बलाहकादौ + अरुन्धती... = बलाहकादावरुन्धतीव