भारतकोश
सिद्धान्तशिरोमणि: गोलाध्याय (भास्कराचार्य - मरीचि भाष्य एवं पं. केदारदत्त जोशी सविस्तार व्याख्या)

सिद्धान्तशिरोमणि: गोलाध्याय (भास्कराचार्य - मरीचि भाष्य एवं पं. केदारदत्त जोशी सविस्तार व्याख्या)

Siddhanta Shiromani Goladhyaya with Marichi Commentary

भास्कराचार्य द्वितीय (भाष्यकार: मुनीश्वर / केदारदत्त जोशी) द्वारा

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होकर पुनः अपनी जगह पर"

Line 4: "ठीक आ जाती है ॥१९॥२०॥२१॥२२॥"

Line 5: "इदानीं देशान्तरस्वरूपमाह—"

Line 6: "येऽनेन लङ्कोदयकालिकास्ते देशान्तरेण स्वपुरोदये स्युः ।"

Line 7: "देशान्तरं प्रागपरं तथाऽन्यद्याम्योत्तरं तच्चरसंज्ञमुक्तम् ॥२३॥"

Line 8: "वा० भा०—य उदयान्तरकर्मणा लङ्कायामौदयिका ग्रहा जातास्ते देशान्तर-"

Line 9: "कर्मणा स्वपुरौदयिकाः स्युः । तच्च देशान्तरं द्विविधम् । एकं पूर्वापरमन्यद्याम्यो-"

Line 10: "त्तरम् । तच्चरसंज्ञमुक्तम् ॥२३॥"

Line 11: "तत्र तावत् पूर्वापरमाह—"

Line 12: "यल्लङ्कोज्जयिनीपुरोपरि कुरुक्षेत्रादिदेशान् स्पृशत्"

Line 13: "सूत्रं मेरुगतं बुधैर्निगदिता सा मध्यरेखा भुवः ।"

Line 14: "आदौ प्रागुदयोऽपरत्र विषये पश्चाद्धि रेखोदयात्"

Line 15: "स्या

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