सिद्धान्तशिरोमणि: गोलाध्याय (भास्कराचार्य - मरीचि भाष्य एवं पं. केदारदत्त जोशी सविस्तार व्याख्या)

सिद्धान्तशिरोमणि: गोलाध्याय (भास्कराचार्य - मरीचि भाष्य एवं पं. केदारदत्त जोशी सविस्तार व्याख्या)
Siddhanta Shiromani Goladhyaya with Marichi Commentary
भास्कराचार्य द्वितीय (भाष्यकार: मुनीश्वर / केदारदत्त जोशी) द्वारा
DevanagariHindipublished723 पृष्ठ
पृष्ठ 253, कुल 723 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 253
मध्यगतिवासना १५१ ख० नि० = अक्षांश = ध्रु नि = ९०° । अतः ध्रु नि-नि ख = ध्रु ख = लम्बांश ९०° ज्या = त्रिज्या, ख० नि० ज्या = अक्षांश ज्या तथा ध्रु० ख० ज्या = लम्ब ज्या । पठित भूपरिधि योजन × लम्बज्या अतः अनुपात से --------------------------- = स्वदेशीय भूपरिधि मान उपपन्न त्रिज्या होता है ।२५।। इति सिद्धान्त शिरोमणि ग्रंथ के ग्रह गोलाध्याय के मध्यगतिवासनाध्यायः-४ की श्री पं० हरिदत्त ज्योतिर्विदात्मज पर्वतीय श्री केदारदत्त जोशी कृत सोपपत्तिक “केदार- दत्त:” हिन्दी व्याख्यान सम्पन्न ।