भारतकोश
सिद्धान्तशिरोमणि: गोलाध्याय (भास्कराचार्य - मरीचि भाष्य एवं पं. केदारदत्त जोशी सविस्तार व्याख्या)

सिद्धान्तशिरोमणि: गोलाध्याय (भास्कराचार्य - मरीचि भाष्य एवं पं. केदारदत्त जोशी सविस्तार व्याख्या)

Siddhanta Shiromani Goladhyaya with Marichi Commentary

भास्कराचार्य द्वितीय (भाष्यकार: मुनीश्वर / केदारदत्त जोशी) द्वारा

DevanagariHindipublished723 पृष्ठ

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न्तरं [space] चाप... Look at the characters: चा [cā] प [pa] ज [ja] or ज्य [jya]? यो [yo] रे [re] क्य [kya] त्वे [tve] न [na] Wait, does it say "चापजयोरेक्यत्वेन" or "चापयोरेक्यत्वेन" or "चापज्ययोरेक्यत्वेन"? Wait, look at: चा प ज्य (it has a loop below, no, it's 'ज' with 'य'?) No, look at: च - ा - प - य - ो - र् - ऐ - क्य... Wait, where is the 'र्'? Above the next letter! Let's look: चा (cā) प (pa) यो (yo) - wait, between 'प' and 'यो', is there anything? Wait, there is 'य' with 'ो': 'यो'. Before that, is there a 'ज'? Let's compare with 'ज' in 'भुज' just before it: 'लघुबृहद्भुजज्यान्तरं': ल - घु - बृ - ह - द्भु - ज - ज्या - न्त - रं Then: चा - प - य - ो - र्? Wait, look at the glyph after 'प': It has a top bar, a vertical

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