भारतकोश
सिद्धान्तशिरोमणि: गोलाध्याय (भास्कराचार्य - मरीचि भाष्य एवं पं. केदारदत्त जोशी सविस्तार व्याख्या)

सिद्धान्तशिरोमणि: गोलाध्याय (भास्कराचार्य - मरीचि भाष्य एवं पं. केदारदत्त जोशी सविस्तार व्याख्या)

Siddhanta Shiromani Goladhyaya with Marichi Commentary

भास्कराचार्य द्वितीय (भाष्यकार: मुनीश्वर / केदारदत्त जोशी) द्वारा

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२५८ गोलाध्याये जिससे अनन्त काल तक ग्रहगणित स्कन्ध का ज्योतिष अपनी प्रतिष्ठा पर यथावत् शुद्ध और स्थिर रहेगा । अतएव वेधादि ज्ञान परम्परा से विलोम गणित से एक कल्प में अयनांश की भगण संख्या ३०००० कही गई हैं । आचार्य मुञ्जाल या तत्कालीन अन्य आचार्यों ने एक कल्प में अयनांश भगण संख्या १९९६६९ कही है । आचार्य भास्कर अन्त में अयनांश भगणों के विवाद में न पड़ कर सम्प्रति के बुद्धिमान् ग्रहणगणितज्ञों द्वारा इष्ट समय में वेध से उपलब्ध अयनांश को अयनांश मान कर ग्रहगणित सिद्धान्त ग्रन्थों की रचना से अयनांशगति का सुनिर्णय करना चाहिए । अयनांश ज्ञान की उपपत्ति—ता० २२-१-१९८५ में वर्त्तमान मेषादि से पश्चिम २३।३८।४९" मेषादि विन्दु । सृष्ट्यारम्भ समय से वर्त्तमान २१-१-१९८५ तक विन्दु पश्चिमाभिमुख चल कर मे विन्दु = में होकर २३°।३९' ।४९" पश्चिम में चलित हो गया । यही वेधसिद्ध सही अयनांश है । सूर्य सिद्धान्त के अनुसार मे स्थिर 'विन्दु मेष राशि में २७° पश्चिम चलकर अनुलोम गति से मे विन्दु में पहुँच कर पुनः पूर्व में २७° जाकर पुनः विलोम गति से मेष राशि में २७° जाता है । इस प्रकार २७ × ४ = १०८ अंश = ३।१८° ही अयन चलन में १ भगण होता है । ।।१७।।१८।।१९।। इदानीं विक्षेपपातानाह— एवं क्रान्तिविमण्डलसंपाताः क्षेपपाताः स्युः । चन्द्रादीनां व्यस्ताः क्षेपानयने तु ते योज्याः ।।२०।। मन्दस्फुटो द्राक्प्रतिमण्डले हि ग्रहो ऽभ्रमत्यत्र च तस्य पातः । पातेन युक्ताद्गणितागतेन मन्दस्फुटात्खेचरतः शरोऽस्मात् ।।२१।। पातेऽथवा शीघ्रफलं विलोमं कृत्वा स्फुटात्तेन युताच्छरोऽतः । चन्द्रस्य कक्षावलये हि पातः स्फुटाद्विधोर्मध्यमपातयुक्तात् ।।२२।। वा० भा०—तथा क्रान्तिवृत्तविमण्डलयोः संपातः क्षेपपातः । तं ग्रहे प्रक्षिप्य क्षेपः साध्यः । एतदुक्तं भवति । क्रान्तिपातः प्रसिद्धः । यथा तं ग्रहे प्रक्षिप्य क्रान्तिः साध्यत एवं विक्षेपपातं ग्रहे प्रक्षिप्य क्षेपः साध्य इत्यर्थः । अथ विक्षेपपातो मन्दस्फुटे यत् प्रक्षिप्यते तत्कारणमाह—मन्दस्फुट इति । यतः शीघ्रप्रतिमण्डले