भारतकोश
सिद्धान्तशिरोमणि: गोलाध्याय (भास्कराचार्य - मरीचि भाष्य एवं पं. केदारदत्त जोशी सविस्तार व्याख्या)

सिद्धान्तशिरोमणि: गोलाध्याय (भास्कराचार्य - मरीचि भाष्य एवं पं. केदारदत्त जोशी सविस्तार व्याख्या)

Siddhanta Shiromani Goladhyaya with Marichi Commentary

भास्कराचार्य द्वितीय (भाष्यकार: मुनीश्वर / केदारदत्त जोशी) द्वारा

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": Could it be "तत्सम्मतत्वादाकाश..."? Let's re-examine line 30 carefully: "यथा तत्सं" then 'म' then 'त' then 'त्' 'त्वा' 'दा' 'का' 'श'? Wait! Look between 'त' and 'दा': 'त' has a 'त्' and 'त्वा'!! Look: 'त' then a conjunct 'त्वा' with 'दा'! Wait: त - त् - सं - म - त - त्वा - दा - का - श - गो - ल - स्थ - श - र - Wait, is it "तत्संमतत्वादाकाश..."? Look: 'त' then 'त्वा' then 'दा'! Yes! There is a 'त्वा'! "तत्संमतत्वादाकाश..." -> "तत्सम्मतत्वात् आकाश..."! Grammatically: "क्रान्तिवृत्तानुकारत्वात् । यथा तत्संमतत्वादाकाशगोलस्थशरवृत्तसंपातस्तत्कक्षायुक्ततरस्तत्स्फुटपातसंज्ञः ।" "तत्संमतत्वाद् आकाशगोलस्थ..." - of course! Let's look at the letters: यथा (यथा) तत्सं (तत्सं) म (म) त (त) त्वा (त्वा - 'त्' + 'व' + 'ा') दा (दा) का (का) श (श) गो (गो) ल (ल) स्थ (स्थ