सिद्धान्तशिरोमणि: गोलाध्याय (भास्कराचार्य - मरीचि भाष्य एवं पं. केदारदत्त जोशी सविस्तार व्याख्या)
Siddhanta Shiromani Goladhyaya with Marichi Commentary
भास्कराचार्य द्वितीय (भाष्यकार: मुनीश्वर / केदारदत्त जोशी) द्वारा
पृष्ठ 37, कुल 723 में से
संदर्भ में पढ़ें( ३० ) क्षेत्र दर्शन से और भी स्पष्ट होगा । जैसे— अ ब क ल चतुर्भुज में ७ × ७ = ४९ कोष्ठक हैं । इसमें ५ × ५ = २५ अ च त प को निकाल देने से ४९ - २५ = २४ अर्थात् २४ कोष्ठक निम्न क्षेत्र की तरह १२ × २ = २४ क्षेत्रफलात्मक बन जाते हैं । तात्पर्य से जो (७ - ५) × (७ + ५) = २ × १२ = २४ = (७)² - (५)² = ४९ - २५ = २४ के तुल्य अर्थात् दो राशियों के योगान्तर का गुणनफल उन्हीं दोनों राशियों के वर्गान्तरों के तुल्य क्षेत्र से भी सुस्पष्ट है । और भी सूत्र हैं कि— चतुर्गुणस्य घातस्य युतिवर्गस्य चान्तरम् । राश्यन्तर कृतेस्तुल्यं द्वयोरव्यक्तयोर्यथा ॥ किन्हीं दो राशियों के अन्तर का वर्ग, उन दोनों राशियों के चतुर्गुणित गुणनफल और उन दोनों राशियों के योग के वर्ग के अन्तर तुल्य होता है । क्षेत्र को देखें— जैसे दो राशियाँ = ५ और ३ (५ × ३) × ४ = ६०