भारतकोश
सिद्धान्तशिरोमणि: गोलाध्याय (भास्कराचार्य - मरीचि भाष्य एवं पं. केदारदत्त जोशी सविस्तार व्याख्या)

सिद्धान्तशिरोमणि: गोलाध्याय (भास्कराचार्य - मरीचि भाष्य एवं पं. केदारदत्त जोशी सविस्तार व्याख्या)

Siddhanta Shiromani Goladhyaya with Marichi Commentary

भास्कराचार्य द्वितीय (भाष्यकार: मुनीश्वर / केदारदत्त जोशी) द्वारा

DevanagariHindipublished723 पृष्ठ

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( ३६ ) यदि प मान इष्ट = ४ तो, क = ५० - २ न - ३६ = (१४ - २ न) / १ अतः कुट्टक से २ ल + १४ = लब्धि, १ ल + ० = गुणक अतः य = ल - २, यदि ल का मान इष्ट कल्पना ३ की जाय तो य = १, क = ८, न = ३ और प = ४ उत्तर होते हैं । इससे मूल्यों और जीवों में उत्थापन देने से—

पक्षीपारावतसारसहंसमोर= १०० पक्षी
५६२७१२
मूल्य३ रु०४० रु०२१ रु०३६ रु०= १०० रुपया
यदि इष्टमान कल्पना व्यक्त संख्या ५ मानें तो
पक्षीपारावतसारसहंसमोरपक्षियों की संख्या = १००
:---:---::---::---::---::---
१५२८४५१२
मूल्य२०३५३६सभी पक्षियों की मूल्य
संख्या द्रव्य = १००
आचार्य ने "एवमिष्टवशादनेकधा" ऐसा भी कहते हुए अनेक प्रकार के मान होते हैं,
कहा है, किन्तु यहाँ पर पक्षियों की संख्या १०० (एक सौ) और सभी योगात्मक पशु
संख्या १०० का मूल्य भी १०० रु० होने से ऐसी स्थिति में उत्तर में मात्र १६ प्रकार की
पक्षी संख्या १६ प्रकार का ही पक्षी संख्याओं का मूल्य ··· ···उत्तर हो सकता है । इस
अनेक वर्ण समीकरण में बुद्धि विवर्धक अनेक प्रश्नों का हल अनेक वर्णों की अव्यक्त
कल्पना से किया गया है । सारा प्रकरण गणितज्ञों के लिए अत्यन्त रोचक एवं गणित
ज्ञानवर्धक है, संक्षेप से कुछ महत्त्वपूर्ण प्रश्नों का हल यहाँ पर दे देना आवश्यक है ।
जैसे—
प्रश्न है कि—वह कौन सी राशि जिसमें २ का भाग देते हैं तो शेष = १, लब्धि में
भी २ का भाग देने से शेष भी १, ३ से भाग देने पर लब्धि २ तथा लब्धि में ३ का
भाग देने पर भी शेष = २, राशि में ५ से भाग देते हैं तो भाग देने से शेष = ३,
लब्धि ३ में भी ५ का भाग देने से शेष भी ३ ही होता है तो राशि मान क्या है ?
अव्यक्त कल्पना से राशिमान् = य ।
अतः य / २ लब्धि = य / २ = २ क + १
∴ यह = ४ क + ३ यहाँ स्वयं एक आलाप घट रहा हैं। फिर य / ३ = ३ न + २
∴ य = ९ न + ६ + २ = ९ न + ८