सिद्धान्तशिरोमणि: गोलाध्याय (भास्कराचार्य - मरीचि भाष्य एवं पं. केदारदत्त जोशी सविस्तार व्याख्या)

सिद्धान्तशिरोमणि: गोलाध्याय (भास्कराचार्य - मरीचि भाष्य एवं पं. केदारदत्त जोशी सविस्तार व्याख्या)
Siddhanta Shiromani Goladhyaya with Marichi Commentary
भास्कराचार्य द्वितीय (भाष्यकार: मुनीश्वर / केदारदत्त जोशी) द्वारा
DevanagariHindipublished723 पृष्ठ
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( ३७ ) अतः ४ क + ३ = ९ न + ८ ∴ क = (९ न + ५) / ४ , कुट्टक गणित से क = ९ य
- ८ । पूर्व में य = ४ क + ३ दिखाया गया है । यहाँ पर क के मान में उत्थापन देने से ९ प + ८ × ४ + ३ = ३६ प + ३५ = य प्रश्न के तीसरे भाग के अनुसार, य = ३६ प + ३५, तथा राशि = ल मानने से ल में ५ सेभाग देने से ३ शेष । क्रिया करने से ५ ल + ३ = ३६ प + ३५ = (५ ल - ३२) / ३६ , कुट्टक गणित से २५ ह + ३ = य से ३६ प + ३५ में उत्थापन देने से ९० ह + १४३ = य यदि ह = ० तो य = राशि = १४३, यदि ह = १ तो राशि = १०४३ यदि ह = २ तो राशि १९४३ इस प्रकार अनन्त उत्तर होते हैं । ऐसी गणित स्थिति में सूत्र कहा भी गया है कि— “निराधारा क्रिया यत्र नियताधारिकाऽपि वा । न तत्र योजयेत् तान्तु कथं सा वा प्रवर्तते” ॥ जिस गणित की क्रिया निराधार (आधार रहित) या नियत आधार इदमित्थम् आधार होता है उस हल में उक्त अनेक गणित की पद्धतियाँ लागू नहीं हो सकती । जैसे- वह कौन सी राशि है जिसे ५ से गुणा करें १३ से भाग दें, भाग देने पर प्राप्त लब्धि को राशि में जोड़ देने से ३० के तुल्य हो जातो है । उस राशि का मान क्या है ? यदि राशिमान = य तो (राशि * ५) / १३ = लब्धि + क अतः य + क = ३० । य = ३० - क, अथवा क = ३० - य ऐसी विचित्र परिस्थिति से कहना पड़ेगा कि यह गणित निराधार है या नियत आधार गणित है जो बीजगणित से भी जिसका साधन नहीं हो रहा है। क्योंकि अन्तर में राशि के मान में फिर भी अव्यक्त ही दृष्टिगोचर होने से राशि का व्यक्त इष्टमान क्या माना जाय ? अतः व्यक्त गणित का ही आश्रय लेकर येन-केन राशिमान निकाला जा रहा है । उपायान्तर का आश्रय लेने से यदि माना राशि + (५ × रा०) / १२ अर्थात् १३ + ५ = १८ अर्थात् राशि और राशिफल के योग में राशिमान - १३ में, फल = ५ तो ३० में क्या त्रैराशिक से (३० × ५) / १८ = २५/३ यह लब्धि हुई । अतः ३० - २५/३ = ६५/३ राशिमान होता है । वस्तुतः आचार्य के कथनानुसार “निराधारा क्रिया” समीचीन सी प्रतीत नहीं हो रही है । जैसे—यदि राशिमान् = य, ५ से गुणा करने पर, ५ य, इसमें १३ का भाग देने से