सिद्धान्तशिरोमणि: गोलाध्याय (भास्कराचार्य - मरीचि भाष्य एवं पं. केदारदत्त जोशी सविस्तार व्याख्या)
Siddhanta Shiromani Goladhyaya with Marichi Commentary
भास्कराचार्य द्वितीय (भाष्यकार: मुनीश्वर / केदारदत्त जोशी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ३८ ) लब्धि = क, अतः लब्धि × भाज्य = ५ य = १३ क ∴ य = १३ क / ५ । लब्धफल + राशि = ३० अतः य + क = ३० ∴ य = ३० - क अतः ३० - क = १३ क / ५ = १५० - ५ क = १३ क अतः १८ क = १५० ∴ क = १५० / १८ = २५ / ३ = लब्धि । राशि और लब्धि = ३० है तो ३० - २५ / ३ = ६५ / ३ राशि, पूर्व तुल्य हो जाती है । इसलिए यह क्रिया निराधार नहीं कही जा सकती, जैसे आचार्य ने कहा है— एक और प्रश्न है वह कौन सी राशि है जिसे २०० से गुणा करने से उसमें ६ गुणित राशिवर्ग जोड़ दें तो वह संख्या वर्गांक हो जाती है । इस प्रश्न के समाधान में आचार्य ने वर्ग प्रकृति गणित का उपयोग किया है । यदि राशिमान अव्यक्त = प्रश्ना- नुसार य × २ = २ य इसमें ६ × राशि वर्ग = ६ य² जोड़ देते हैं तो ६ य² + २ य होता है इसका मूल मिलना चाहिए । कल्पना किया इसका मान दूसरे अव्यक्त क वर्ग के तुल्य है तो ६ य² + २ य =