भारतकोश
सिद्धान्तशिरोमणि: गोलाध्याय (भास्कराचार्य - मरीचि भाष्य एवं पं. केदारदत्त जोशी सविस्तार व्याख्या)

सिद्धान्तशिरोमणि: गोलाध्याय (भास्कराचार्य - मरीचि भाष्य एवं पं. केदारदत्त जोशी सविस्तार व्याख्या)

Siddhanta Shiromani Goladhyaya with Marichi Commentary

भास्कराचार्य द्वितीय (भाष्यकार: मुनीश्वर / केदारदत्त जोशी) द्वारा

DevanagariHindipublished723 पृष्ठ

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पृष्ठ 47

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( ४० ) प्रश्न है—४ और ३ से गुणित राशियों के योगफल में २ जोड़ देने से वह अंक उन दोनों राशियों के गुणनफल के तुल्य हो जाता है । कल्पना से भुज = य, कोटि = क, ये भावित क्षेत्र की भुज और कोटि होती हैं। अतः भावित क्षेत्र का क्षेत्रफल = य × क इस क्षेत्र से यदि ४ य, ३ (क - ४) इतना कम कर देते हैं तो शेष = य - क - ४ य - ३ (क - ४) = (य - ३) (क - ४) अतः य × क = ४ य + ३ क + २ अतः (४ य + ३ क + २) - ४ य - ३ क + १२ = १४ अतः १४ = ४ × ३ + २ = (वर्गांक × वर्गांक) + २ के तुल्य है । इसीलिए आचार्य ने कहा है— उपपत्तियुतं बीजगणितं गणका जगुः । न चेदेवं विशेषोऽस्ति न पाटीबीजयोर्यतः । १० और १४ से गुणित दो राशियों के योग में ५८ कम कर देने से प्राप्त अंक के तुल्य