भारतकोश
सिद्धान्तशिरोमणि: गोलाध्याय (भास्कराचार्य - मरीचि भाष्य एवं पं. केदारदत्त जोशी सविस्तार व्याख्या)

सिद्धान्तशिरोमणि: गोलाध्याय (भास्कराचार्य - मरीचि भाष्य एवं पं. केदारदत्त जोशी सविस्तार व्याख्या)

Siddhanta Shiromani Goladhyaya with Marichi Commentary

भास्कराचार्य द्वितीय (भाष्यकार: मुनीश्वर / केदारदत्त जोशी) द्वारा

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क्षिणभागस्थयष्टेश्च्छाया भवतीति ध्येयम् । ततो" Wait, "स्थयष्टेश्च्छाया": "स्थयष्टेश्च्छाया" - yes, 'ष्टे' + 'श्' + 'छा' with double chha? 'च्छा'. "दक्षिणगोले दक्षिणपार्श्वे दक्षिणभागस्थयष्टेश्च्छाया भवतीति ध्येयम् । ततो"

Line 23: "यथा यथा रविरूर्ध्वं याति तथा तथार्कचिह्नाद्यष्टिच्छाया चक्रेऽग्रे यात्यतोऽभीष्टकालिक-" Wait, "तथार्कचिह्नाद्यष्टिच्छाया चक्रेऽग्रे यात्यतोऽभीष्टकालिक-" or "चक्रेऽग्रो"? Wait, look at 'चक्रेऽग्रो' vs 'चक्रेऽग्रे': The letter is 'ग', subscript 'र' (making 'ग्र'), and then: is there an 'ा' (aa-danda) and an 'े' stroke? Look at 'ग्रो' in line 8: "भूगोलानुकल्पकाष्ठगोलो" -> 'गो' has a danda and stroke. In line 23: look at "चक्रेऽग्रे": there is 'ग', '्र', and the top stroke is attached to 'ग' directly, with NO following danda! That is definitely 'ग्रे'! Wait, what is the little mark after 'ग्रे'?