सिद्धान्तशिरोमणि: गोलाध्याय (भास्कराचार्य - मरीचि भाष्य एवं पं. केदारदत्त जोशी सविस्तार व्याख्या)
Siddhanta Shiromani Goladhyaya with Marichi Commentary
भास्कराचार्य द्वितीय (भाष्यकार: मुनीश्वर / केदारदत्त जोशी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ५२ ) ११. ध्रुव स्थान (Pole Star) और स्वखमध्य (Zenith) का याम्योत्तर वृत्तीय अन्तर चाप का नाम लम्बांस (९०°-अक्षांश) है । १२. दोनों समस्थान चिह्नों से ४५° पेंतालिस अंश पूरब और पश्चिम की तरफ की दूरी पर अपने क्षितिज (Horizon) वृत्तीय बिन्दु पर और दोनों खस्वस्तिक और अधः स्वस्तिक (Zenith and Nadir) बिन्दुओं पर गये वृत्तों के नाम कोणवृत्त हैं । (१) ईशान (North East) से नैऋत्य (South West) तक कोण वृत्त है । (२) वायव्य से (North West) अग्नि कोण (South East) तक गया हुआ होता है । इन्हें विदिग्वृत्त भी कहते हैं । १३ नाडीवृत्त (Equator Circle) अपना पूर्वापर वृत्त (Prine Vertical Circle) उन्मण्डल (Six O' Glock Circle) और क्षितिज (Horizon) वृत्तों के पृष्ठीय केन्द्र (Center) याम्योत्तर वृत्त में (Meridian Circle) में होते हैं । इसलिए याम्योत्तर वृत्त के पृष्ठीय केन्द्र पूर्व स्वस्तिक बिन्दु पर चारों वृत्त का सम्पात (Connecting Point) बिन्दु का गोल में, पूर्वस्वस्तिक नाम है । १४. आकाशस्थ ग्रह बिम्ब के गर्भ केन्द्र और दोनों खमध्यों (Zenith and Nadir) पर गये हुए वृत्त का नाम दृग्वृत्त (Verticalcircle) है । इस दृग्वृत्त में खमध्य (Zenith) से ग्रह बिम्ब तक नतांश (Zenithdistarce) तथा क्षितिज से (Horizon) ग्रह (Planet) बिम्ब तक उन्नतांश (Altitude) तथा नतांश को ज्या दृग्ज्या एवं उन्नतांश की ज्या शंकु होती है । १५. ध्रुव स्थान से २४° चौबीस अंश चाप की दूरी पर कदम्ब भ्रमवृत्त में कदम्ब तारा (Pole of the Ecliptic) रहती है । कदम्ब को केन्द्र मानकर नब्बे अंश की दूरी के चाप से जो वृत्त बनेगा उसे क्रान्ति वृत्त (Ecliptic or Orbit) कहते हैं । १६. इसी प्रकार कदम्ब से शर चाप की दूरी पर (चन्द्रमा आदिक ग्रह जिस वृत्त में अपनी गतियों से चलकर राशि चक्र की परिक्रमा करते हैं उस मार्ग का नाम विमण्डल हैं ।) विमण्डल वृत्त का पृष्ठीय केन्द्र विक्षेपवम्ब होता है । यथा चन्द्र भ्रमण मार्ग का नाम चन्द्र विमण्डल होता है । इसी प्रकार और ग्रहों का भी विमण्डल होता है । १७. नाडी (Equator) वृत्त और क्रान्ति वृत्त (Ecliptic or Orbit) के सम्पात बिन्दु का नाम गोल संधि (Node of an Orbit) या क्रान्ति पात है । इन दो बड़े वृत्तों के इन दो सम्पातों में एक सम्पात का नाम सायन मेषादि (वसन्त-सम्पात) (Ascending node of the Equator) (First Point of Aples, Vernal Equinox) और दूसरे सम्पात का नाम सायन तुलादि (Descending node of the Equator first Point of Libra, Aatumnal Equinox) कहा जाता है ।