सिद्धान्तशिरोमणि: गोलाध्याय (भास्कराचार्य - मरीचि भाष्य एवं पं. केदारदत्त जोशी सविस्तार व्याख्या)
Siddhanta Shiromani Goladhyaya with Marichi Commentary
भास्कराचार्य द्वितीय (भाष्यकार: मुनीश्वर / केदारदत्त जोशी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ५१ ) इसी प्रसंग में इसी प्रकार सर्व साधारण के समझने के लिए ग्रह गणित गोल की कुछ परिभाषाएँ तथा संक्षेप से आवश्यक पारिभाषिक शब्दों का परिचय निम्न भाँति दे देना आवश्यक है क्योंकि इस गोल-बन्धाधिकार से ही निम्न विषय सविशेष सम्बन्धित हैं । १. किसी भी खगोलीय वृत के तीन केन्द्र होते हैं । एक गर्भीय केन्द्र और दो पृष्ठीय केन्द्र होते हैं । २. पृष्ठीय केन्द्रों से ९० अंश के तुल्य चाप से वृहद्वृत्त बनते हैं । नब्बे अंश से कम दूरी के बनाये गये वृत्तों को लघुवृत्त कहते हैं । नियत एक केन्द्र के बृहद्वृत्त और लघुवृत्त परस्पर समानान्तर भी होते हैं । जैसे नाड़ीवृत्त (Equator) का समानान्तर (Parallal of Latitude) वृत्त अहोरात्र वृत्त (Diurnal Circle) है । ३. पृथ्वी के गोल केन्द्र से ध्रुव की तरफ वर्द्धित रेखा जहाँ पृथ्वी पृष्ठ में लगती समझी जाती है वहीं पर पृथ्वी में ध्रुव बिन्दु है । उत्तर की ओर उत्तर ध्रुव अर्थात् ध्रुव निष्ठ. बिन्दु देवताओं के लिए वास्तविक ध्रुव तारा उनके शिर पर आकाश में खमध्य में होती है । इसी प्रकार दक्षिण ध्रुव पृष्ठ में बसने वालों के लिए दक्षिण ध्रुव, आकाश में उनके शिर के ऊपर दीखेगा । इसी ध्रुव की मेरु पर्वत संज्ञा खगोलज्ञ शास्त्रकारों ने की है । ४. अपने स्थान से आकाश में अपने शिर के ऊपर खमध्य आकाश मध्य (Zenith) बिन्दु है । ठीक अपने खमध्य से १८०° की दूरी पर अधः खमध्य (Nadir) है । अपने दोनों खमध्यों और दोनों ध्रुवों पर गये हुये वृत्त का नाम याम्योत्तर वृत्त (Meridian Circle) है । ५. ध्रुव से (Pole Star) नब्बे अंश की दूरी पर नाड़ीवृत्त (Equatar Circle) होता है । यहाँ पर अक्षांश (Latitude) शून्य होता है । ६. नाड़ीवृत्त (Equator) और याम्योत्तर वृत्त (Meridian Circle) के सम्पात (Node) बिन्दु का नाम निरक्ष खमध्य होता है । ७. निरक्ष खमध्य से नब्बे अंश चाप की दूरी पर से बनाये गये वृत्त (Circle) को उन्मण्डल (Six O' Clock Circle) वृत्त कहते हैं । ८ अपने खमध्य (Zenith) से नब्बे अंश चाप की दूरी से जो वृत्त बनता है उसे क्षितिज (Horizon) वृत्त कहते हैं । ९. अपने क्षितिज (Horizon) वृत्त और याम्योत्तर वृत्त (Meridian Circle) के सम्पात बिन्दु का नाम समस्थान (Connecting Point) है । यह समस्थान बिन्दु पूर्वापर (Prime Vertical Circle) वृत्त का पृष्ठीय केन्द्र है । १०. समस्थान और ध्रुवस्थान (Pole Star Pace) का याम्योत्तर वृत्तीय (Meri- dion Circle) अन्तर चाप का नाम अपना स्वमध्य (Zenith) और निरक्ष खमध्य का का याम्योत्तर वृत्तीय अन्तर चाप का नाम अक्षांश (Latitude, Terrestril Axis) है ।