भारतकोश
सिद्धान्तशिरोमणि: गोलाध्याय (भास्कराचार्य - मरीचि भाष्य एवं पं. केदारदत्त जोशी सविस्तार व्याख्या)

सिद्धान्तशिरोमणि: गोलाध्याय (भास्कराचार्य - मरीचि भाष्य एवं पं. केदारदत्त जोशी सविस्तार व्याख्या)

Siddhanta Shiromani Goladhyaya with Marichi Commentary

भास्कराचार्य द्वितीय (भाष्यकार: मुनीश्वर / केदारदत्त जोशी) द्वारा

DevanagariHindipublished723 पृष्ठ

पृष्ठ 598, कुल 723 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 598

म्बितमित्यनुचितद्योतनार्थं रे Letters: किं त दा ह - रे इ त्या दि । प थि क वि रु द्ध स म ये प थि क त्व मा ल म्बि त मि त्य नु चि त द्यो त ना र्थं रे Wait, look at "मालम्बितमित्यनुचित...": म - ा - ल - म्बि - त - मि - त्य - नु - चि - त - द्यो - त - ना - र्थं Wait, is it "मालम्बितम्" or "मवलम्बितम्"? Look at the character after 'मा': It is 'ल': "मालम्बितम्"! (Or 'व'? No, 'ल' has two humps: ल. Wait, look at 'ल' in 'इत्यादि': line 24 has 'इत्यादि', line 23 has 'गुणत्वाद्वा'. In line 24, look at the letter between 'मा' and 'म्बि': it is definitely 'ल', so "मालम्बितम्").

Line 25: इत्यज्ञसंबोधनम् । पान्थाः प्रियाधिष्ठितप्रदेशातिरिक्तप्रदेशेष्वतिकष्टभूतमार्गत्वाभिमानात्त- Letters: इ त्य ज्ञ सं बो ध न म् । पा न्थाः प्रि या धि ष्ठि त प्र दे शा ति रि क्त प्र दे शे ष्व ति क ष्ट भू त मा