भारतकोश
सिद्धान्तशिरोमणि: गोलाध्याय (भास्कराचार्य - मरीचि भाष्य एवं पं. केदारदत्त जोशी सविस्तार व्याख्या)

सिद्धान्तशिरोमणि: गोलाध्याय (भास्कराचार्य - मरीचि भाष्य एवं पं. केदारदत्त जोशी सविस्तार व्याख्या)

Siddhanta Shiromani Goladhyaya with Marichi Commentary

भास्कराचार्य द्वितीय (भाष्यकार: मुनीश्वर / केदारदत्त जोशी) द्वारा

DevanagariHindipublished723 पृष्ठ

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५९० गोलाध्याये केदारदत्तः—इस प्रकार के अनेक गणितगोल के चमत्कृत बुद्धिवर्द्धक प्रश्न और समाधान भी गोलाध्याय की समाप्ति में आचार्य ने किये हैं। प्रायः इस प्रकार के सभी प्रश्नों का भंग (समाधान) ग्रहगणिताध्याय के त्रिप्रश्नाधिकारान्त में किये गये हैं और जिनका स्पष्टीकरण शिखा नामक हिन्दी भाषा माध्यम से किया गया है। यहाँ पर ग्रंथ विस्तार भय से हम इस प्रश्नाध्याय को— 'दिनकरे करिवैरिदल ४।१५ स्थिते नरसमा नरभापरदिङ्मुखी। भवति यत्र पुटो पुटभेदने कथय तांत्रिक तत्र पलप्रभाम्॥ मात्र ३९ श्लोकोक्त प्रश्न का सयुक्तिक समाधान यहाँ पर दे रहे हैं। इसी प्रकार विषय वैदुष्य प्राप्त खगोलज्ञों से अन्य प्रश्नों का समाधान स्वयं हो जायगा। आचार्य का कहना है कि जिस समय सूर्य सिंह राशि में १५ अंश है उस समय उस नगर में १२ अंगुल शङ्कु की छाया १२ अगुल के तुल्य ही पश्चिमाभिमुखी देखी गयी है तो, हे तान्त्रिक (= खगोलज्ञ) उस नगर की पलभा का मान बताओ। आचार्य उस नगर का अ