भारतकोश
सिद्धान्तशिरोमणि: गोलाध्याय (भास्कराचार्य - मरीचि भाष्य एवं पं. केदारदत्त जोशी सविस्तार व्याख्या)

सिद्धान्तशिरोमणि: गोलाध्याय (भास्कराचार्य - मरीचि भाष्य एवं पं. केदारदत्त जोशी सविस्तार व्याख्या)

Siddhanta Shiromani Goladhyaya with Marichi Commentary

भास्कराचार्य द्वितीय (भाष्यकार: मुनीश्वर / केदारदत्त जोशी) द्वारा

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(आधुनिकल्पक = आधुनिक + कल्पक with elision, or typo forआधुनिककविकलपनयाorआधुनिकल्पक)? Look at the image very carefully: त्य ने ना ऽऽ धु नि ल् ल् याYes! The letters are literally:इत्यनेनाऽऽधुनिकल्पककल्पनया! Every single glyph matches:इत्यनेनाऽऽधुनिकल्पककल्पनया`!

Line 22: स्वबुद्धिकल्पनयैवेति सूचितम् । तथाच तदन्तरकालजग्रन्थेष्वप्येषां विशेषाणामदर्शनान्मत्कृतग्रन्थ-

Line 23: वैयर्थ्यं नेति भावः ।। नन्वेवं लाघवाद्ग्रन्थसमाप्तिकालिकशालिवाहनशकातीतवर्षाणां द्विनग-

Line 24: दिङ्मितानां कथनेनैवाऽऽशङ्कानिवारणसंभवादुक्तरीतिगोरवमितिश्चेन्न ।। बाल्यं वृद्धिर्वपुः Wait, उक्तरीतिगोरवमितिश्चेन्न or उक्तरीतिगौरवमितिश्चेन्न? Look at गोरव: it has ONE matra on top