सिद्धान्तशिरोमणि: गोलाध्याय (भास्कराचार्य - मरीचि भाष्य एवं पं. केदारदत्त जोशी सविस्तार व्याख्या)
Siddhanta Shiromani Goladhyaya with Marichi Commentary
भास्कराचार्य द्वितीय (भाष्यकार: मुनीश्वर / केदारदत्त जोशी) द्वारा
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स्वबुद्धिकल्पनयैवेति सूचितम् । तथाच तदन्तरकालजग्रन्थेष्वप्येषां विशेषाणामदर्शनान्मत्कृतग्रन्थ-
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वैयर्थ्यं नेति भावः ।। नन्वेवं लाघवाद्ग्रन्थसमाप्तिकालिकशालिवाहनशकातीतवर्षाणां द्विनग-
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दिङ्मितानां कथनेनैवाऽऽशङ्कानिवारणसंभवादुक्तरीतिगोरवमितिश्चेन्न ।। बाल्यं वृद्धिर्वपुः
Wait, उक्तरीतिगोरवमितिश्चेन्न or उक्तरीतिगौरवमितिश्चेन्न?
Look at गोरव: it has ONE matra on top