सिद्धान्तशिरोमणि: गोलाध्याय (भास्कराचार्य - मरीचि भाष्य एवं पं. केदारदत्त जोशी सविस्तार व्याख्या)
Siddhanta Shiromani Goladhyaya with Marichi Commentary
भास्कराचार्य द्वितीय (भाष्यकार: मुनीश्वर / केदारदत्त जोशी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंदेखकर, सिहोर नगर के सेवाराम ज्योतिषी के पास अध्ययन के लिए भेजा। वहाँ दो वर्ष तक रेखागणित आदि पढ़कर एजेण्ट विल्किन्सन साहब की अनुकम्पा से ता० १५ फरवरी, सन् १८४२ में गवर्नमेण्ट संस्कृत कालेज बनारस में इनकी नियुक्ति ज्योतिषा- ध्यापक पद पर हो गई। श्री पं० लज्जाशंकर के निधन के बाद ये प्रधान ज्योतिषशास्त्रा- ध्यापक नियुक्त किये गये। इन्होंने [मुद्रित] (१) रेखा गणित प्रथम अध्याय, (२) त्रिभुज गणित, (३) त्रिकोणमिति, (४) सायनवाद, (५) प्राचीन ज्योतिषशास्त्राचार्यों का आशय वर्णन, (६) १८ प्रकार के विचित्र प्रश्नों का सोत्तरसंग्रह, (७) तत्त्वविवेक परीक्षा [अमुद्रित], (८) काशी के मान मन्दिर यन्त्र का वर्णन, (९) दशमलवादि गणित, (१०) चलन कलन के सिद्धान्त मात्र ज्ञान के २० सिद्धान्त, चापीय त्रिकोण के कुछ सिद्धान्त, (१) ग्रन्थोपयोगी कुछ क्रोड पत्र, (१०) यन्त्र राजोपयोगी परिलेखादि, (१३) हिन्दी भाषा में पाठशालीय छात्रोपकार के लिए, बीजगणित, (१