सिद्धान्तशिरोमणि: गोलाध्याय (भास्कराचार्य - मरीचि भाष्य एवं पं. केदारदत्त जोशी सविस्तार व्याख्या)
Siddhanta Shiromani Goladhyaya with Marichi Commentary
भास्कराचार्य द्वितीय (भाष्यकार: मुनीश्वर / केदारदत्त जोशी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ८९ ) ङ्किणी । (१३) दिङ्मीमांसा । (१४) द्युचरचारः । (१५) फ्रेंच भाषा से संस्कृत में बनाई हुई चन्द्रसारिणी तथा भौमादि ग्रहों की सारणी ७ खण्डों में (१६) १.१००००० लघुरिक्थ की सारिणी तथा एक एक कला की ज्यादिसारिणी । (१७) समीकरण मीमांसा (Theorey of Equetinos) दो भागों । (१८) गणित कौमुदी । प्राचीन आचार्यों के— सुधाकर द्विवेदी कृत भाष्य, टीका, उपपत्ति और अनेक मतो की मीमांसा के साथ परिष्कृत तथा तथ्य मत प्रदर्शन पूर्वक मुद्रित ग्रन्थ । (गणित ज्योतिष) (१७) वराहमिहिरकृत पञ्चसिद्धान्तिका । (१८) कमलाकर भट्ट विरचितः सिद्धान्त तत्वविवेकः । (१९) लल्लाचार्यकृतशिष्यधीवृद्धिदतन्त्रम् । (२०) करणकुतूहलः वासना विभूषण सहितः । (२१) भास्करीय लीलावती टिप्पणी सहिता । (२२) भास्करीय बीज- गणितं टिप्पणी सहितम् । (२३) वृहत्संहिता भट्टोत्पल टीका सहिता । (२४) ब्राह्मस्फुट- सिद्धान्तः स्वकृततिलक (भाष्य) सहितः । (२५) ग्रहलाघवः, स्वकृतटीका सहितः । (२६) याजुष ज्योतिषं सोमाकर भाष्य सहितम् । (२७) श्रीधराचार्यकृत स्वकृतटीका सहिता च त्रिशतिका । (२८) करण प्रकाशः सुधाकर कृत-उपपत्ति सहितः । (२९) सूर्य- सिद्धान्तः सुधाकरकृत सुधावर्षिणीसहितः । (३०) सूर्यसिद्धान्तस्य-एका बृहत्सारिणी तिथिनक्षत्रयोगकरणानां घटीज्ञापिका । उक्त ये ग्रन्थ सर्वत्र सुलभ होते हुये भी अब आज कठिनता से उपलब्ध हैं । इनका पुनर्मुद्रण आवश्यक है । हिन्दी भाषा में मुद्रित (गणित ज्योतिष) ग्रन्थ (३१) चलन कलन । (Defininition Calculus) (३२) चलराशिकलन । (Integral Calculus) (३३) ग्रहण । (३४) गणित का इतिहास । (३५) पञ्चाङ्ग विचार (३६) पञ्चाङ्ग प्रपञ्च तथा काशी की समय समय पर की अनेक शास्त्रीय व्यवस्था । आज भारत की राष्ट्र भाषा हिन्दी हो गई है । भारतेन्दु कविवर्य्य बाबू हरिश्चन्द्र के साथ-साथ म० म० पं० सुधाकर द्विवेदी ने अपने समय में हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनाने की उच्च शब्दों में उद्घोषणा कर दी थी । तदनुसार द्विवेदी जी ने अपनी लेखनी को हृदय से हिन्दी की दिशा में भी घुमा कर निम्न लिखित कुछ ग्रन्थों को (अपने विशेष विचारों के साथ) मुद्रित किया था और अपनी मौलिक रचना से भी हिन्दी में ग्रन्थों को लिखा था । जैसे—(३७) भाषा बोधक प्रथम । (३८) भाषा बोधक द्वितीय भाग । (३९) हिन्दी भाषा का व्याकरण (पूर्वाद्धं) (४०) तुलसी सुधाकर (तुलसी सतसई पर कुण्डलियाँ) (४१) महाराज “माण्डाधीश” श्री रुद्रसिंह कृत रामायण का मुद्रण ।