भारतकोश
सिद्धान्तलेशसंग्रह (अप्पय्य दीक्षित - हिन्दी अनुवाद व व्याख्या)

सिद्धान्तलेशसंग्रह (अप्पय्य दीक्षित - हिन्दी अनुवाद व व्याख्या)

Siddhanta Lesha Sangraha Hindi

श्रीमदप्पय्य दीक्षित द्वारा

स्रोत: Siddhanta Lesha Sangraha of Appayya Dikshita with Hindi Bhashya (उद्गम)

DevanagariHindipublished590 पृष्ठ

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पृष्ठ 245

सकारण अध्यासका विचार ] भाषानुवादसहित २१५


इदमाकारवृत्त्येदमंशे मोहक्षितावपि ।
शुक्त्याद्यंशेऽक्षितत्वेन. रजताद्युद्भवस्ततः ॥ १०८ ॥
अत एव स्फुरन् भ्रान्तावाधार इदमंशकः ।
शुक्तवाद्यंशस्त्वधिष्ठानं सकार्यज्ञानगोचरः ॥ १०९ ॥

इदमाकार वृत्तिसे इदमंशमें आवरणका नाश होनेपर भी शुक्ति आदि अंशमें आवरणका विनाश न होनेसे उस अज्ञानसे रजतका उद्भव होता है । इसीसे भ्रान्तिमें स्फुरनेवाला इदमंश आधार है और रजतादिविक्षेपके साथ अज्ञानका विषय शुक्ति आदि अंश अधिष्ठान है ॥ १०८ ॥ १०९ ॥

अत्राहुः--इदमाकारवृत्त्या इदमंशाज्ञाननिवृत्तावपि शुक्तित्वादिविशेषां-
शाज्ञानानिवृत्तेः तदेव रजतोपादानम्, शुक्तित्वाद्यज्ञाने रजताध्यासस्य
तद्भाने तदभावस्याऽनुभूयमानत्वात् । अध्यासभाष्यटीकाविवरणे अनुभूय-
मानान्ययव्यतिरेकस्यैवाऽज्ञानस्य रजताद्यध्यासोपादानत्वोक्तेः ।

है, [ अतः व्यभिचार है ] यदि इदमाकार वृत्तिको उक्त स्थलमें अज्ञानका अभिभावक मानेंगे, तो अज्ञानरूप रजतोपादानका अभाव होनेसे शुक्तिमें रजतकी उत्पत्ति ही नहीं हो सकेगी ?

इस आक्षेपके समाधानमें कोई कहते हैं कि इदमाकार वृत्तिसे इदमंशके अज्ञानकी निवृत्ति होनेपर भी शुक्तित्व आदि विशेष-अंशके अज्ञानकी निवृत्ति नहीं होनेसे वही विशेष अंशका अज्ञान रजत आदिका उपादान है, क्योंकि शुक्तित्व आदिके अज्ञानके होनेपर रजतका अध्यास होता है और शुक्तित्व आदिके अज्ञानके न होनेपर रजतका अध्यास नहीं होता है, इस प्रकार अन्वय और व्यतिरेक देखे जाते हैं । और अध्यासभाष्यकी पञ्चपादिका नामकी टीकाके विवरणमें *—जिसके अन्वय और व्यतिरेक अनुभूयमान हैं,


* श्रीपद्मपादाचार्यकृत पञ्चपादिका शङ्करभाष्यकी टीका है, वह सम्पूर्ण भाष्यके ऊपर उपलब्ध नहीं होती । प्रकाशात्मयतिकृत विवरण इसकी टीका है, ये दोनों चतुःसूत्री तक मुद्रित हैं । इस विवरण में अन्वय और व्यतिरेकसे अज्ञान अध्यासका उपादान कारण माना गया है, यहाँकी कुछ पंक्तियां इस प्रकार हैं—
'ननु कथं मिथ्याऽज्ञानमध्यासस्योपादानम् ? तस्मिन् सति अध्यासस्योदयादसति चानुदया- दिति ब्रूमः । ननु अध्यासस्य प्रतिबन्धकं तत्त्वज्ञानं तदभावश्चाज्ञानमिति प्रतिबन्धकाभाव