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सिद्धान्तलेशसंग्रह (अप्पय्य दीक्षित - हिन्दी अनुवाद व व्याख्या)

सिद्धान्तलेशसंग्रह (अप्पय्य दीक्षित - हिन्दी अनुवाद व व्याख्या)

Siddhanta Lesha Sangraha Hindi

श्रीमदप्पय्य दीक्षित द्वारा

स्रोत: Siddhanta Lesha Sangraha of Appayya Dikshita with Hindi Bhashya (उद्गम)

DevanagariHindipublished590 पृष्ठ

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अध्ययनसे ज्ञात हो सकता है। आचार्यपादके सिवा अन्य कोई सिद्धान्त नहीं है, जिसका कि इतने आदरसे अनेक प्रगल्भ पण्डितों द्वारा आदर किया गया हो।

ऐसे विशिष्ट ग्रन्थकी हिन्दी भाषा हो जानेसे उन लोगोंको अवश्य आनन्द मिलेगा जो लोग अनूदित हिन्दी भाषाके समझनेमें अच्छी व्युत्पत्ति रखते हैं। हिन्दी भाषाके सारल्यमें अत्यन्त ध्यान रखा गया है, और जहाँ मूलमें काठिन्य मालूम हुआ है, वहाँ टिप्पणी द्वारा उस अंशको ठीक-ठीक साफ करनेकी चेष्टा की है। विशेषतः टिप्पणीमें यह भी बतलानेका अधिक यत्न किया गया है कि जिन ग्रन्थोंसे मूलकारने मत लिया है, उन ग्रन्थोंकी अक्षरशः पङ्क्तियाँ रखकर उनके पृष्ठाङ्क भी दिये हैं और उनका भाव भी लिखा है।

दूसरी बात इस ग्रन्थमें आये हुए मतोंका संक्षेपसे आकलन हो, इसलिए साथ-साथ वेदान्तसूक्तिमञ्जरीका भी अनुवादके साथ समावेश किया गया है। इसके रचयिता श्रीपरमहंसपरिव्राजकाचार्य गङ्गाधरसरस्वतीथे। ये अच्छे शास्त्रवेत्ता होंगे, ऐसा उनकी सूक्तिमञ्जरीकी रचनासे ज्ञात होता है, इससे अधिक उनके विषयमें जाननेकी सामग्री नहीं मिल सकी है।

जिस आनन्दकन्द परमेश्वरकी असीम कृपासे इस सिद्धान्तलेशका अनुवाद-प्रकाशन कार्य निर्विघ्न समाप्त हुआ है, उसको सहस्रशः प्रणाम करते हुए विश्रान्ति लेते हैं।

काशी।
वसन्तपञ्चमी १९९३

मूलशङ्कर व्यास

ankurnagpal108@gmail.com