सिद्धान्तलेशसंग्रह (अप्पय्य दीक्षित - हिन्दी अनुवाद व व्याख्या)

सिद्धान्तलेशसंग्रह (अप्पय्य दीक्षित - हिन्दी अनुवाद व व्याख्या)
Siddhanta Lesha Sangraha Hindi
श्रीमदप्पय्य दीक्षित द्वारा
स्रोत: Siddhanta Lesha Sangraha of Appayya Dikshita with Hindi Bhashya (उद्गम)
DevanagariHindipublished590 पृष्ठ
पृष्ठ 27, कुल 590 में से
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॥ श्रीः ॥
सिद्धान्तलेश-सङ्ग्रहकी विषय-सूची
प्रथम परिच्छेद [ पृ० १-२६२ ]
| विषय | पृष्ठ-पंक्ति |
|---|---|
| अपूर्वविधि, नियमविधि और परिसङ्ख्याविधिका निरूपण ... | ४ - १ |
| श्रवणविधिमें अपूर्वविधित्वका निरूपण ... ... | १० - ५ |
| ब्रह्मके लक्षणका विचार ... ... ... | ५३ - ५ |
| ब्रह्ममें कारणत्वका विचार ... ... ... | ५७ - १० |
| मायाके कारणत्वका विचार ... ... ... | ७४ - ६ |
| जीव और ईश्वरके स्वरूपका विचार ... ... ... | ८१ - ९ |
| जीवके एकत्व और अनेकत्व का विचार ... ... | १२१ - १ |
| ब्रह्ममें कर्तृत्वका प्रतिपादन ... ... ... | १३२ - १२ |
| ब्रह्मके सर्वज्ञत्वका समर्थन ... ... ... | १३७ - ८ |
| वृत्तिकी उपयोगिताका विचार ... ... ... | १४३ - ३ |
| वृत्तिका विषयके साथ सम्बन्ध-विचार ... ... | १४६ - ८ |
| अभेदकी अभिव्यक्तिके स्वरूपका निरूपण ... ... | १५२ - ६ |
| आवरणाभिभवके स्वरूपका निरूपण ... ... | १५७ - ६ |
| साक्षीके स्वरूपका निरूपण ... ... ... | १८० - १ |
| अज्ञानसे साक्षीके अनावृतत्वका निरूपण ... ... | १९३ - १ |
| साक्षीरूप आनन्दमें अनावृतत्वका निरूपण ... ... | १९५ - ३ |
| अहङ्कार आदिके अनुसन्धानका निरूपण ... ... | २०६ - १ |
| सकारण अध्यासका निरूपण ... ... | २१४ - १ |
| वृत्तिके निर्गमनकी आवश्यकताका निरूपण ... ... | २४७ - ५ |
द्वितीय परिच्छेद [ पृ०२६३-४१४ ]
| विषय | पृष्ठ-पंक्ति |
|---|---|
| प्रत्यक्षसे अद्वैतश्रुतिके अवाधितत्वका निरूपण ... ... | २६३ - ८ |
| प्रत्यक्षसे आगमके प्राबल्यका विचार ... ... | २७९ - ५ |
| उपजीव्यत्वरूपसे भी प्रत्यक्षसे श्रुतिके अबाधितत्वका विचार ... | ३०८ - ५ |
| प्रतिविम्बकी सत्यताका निराकरण ... ... ... | ३१६ - १ |
| स्वाप्न पदार्थोंके अधिष्ठानका निरूपण ... ... | ३४० - ८ |