भारतकोश
सिद्धान्तलेशसंग्रह (अप्पय्य दीक्षित - हिन्दी अनुवाद व व्याख्या)

सिद्धान्तलेशसंग्रह (अप्पय्य दीक्षित - हिन्दी अनुवाद व व्याख्या)

Siddhanta Lesha Sangraha Hindi

श्रीमदप्पय्य दीक्षित द्वारा

स्रोत: Siddhanta Lesha Sangraha of Appayya Dikshita with Hindi Bhashya (उद्गम)

DevanagariHindipublished590 पृष्ठ

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( २ )

स्वाप्न पदार्थोंके अनुभव-प्रकारका निरूपण ... ... ३४१ - १५
सृष्टिके कल्पकका निरूपण ... ... ... ३५६ - ९
मिथ्या अर्थकी अर्थ-क्रियाकारिताका निरूपण ... ... ३६६ - ५
मिथ्याके मिथ्या होनेपर भी प्रपञ्चके मिथ्यात्वकी उपपत्ति ... ३७४ - ६
जीवोपाधिके भेदका विचार ... ... ... ३८० - ७
उपाधिके भेदसे भी 'मैं सुखी हूँ' इत्यादि अनुसन्धानका विचार ... ३९४ - ७
जीवके अणुत्वका निराकरण-विचार ... ... ... ३९८ - ५

तृतीय परिच्छेद [ पृ० ४१५-५१० ]

ज्ञानकी उत्पत्तिमें कर्मोंकी उपयोगिताका विचार ... ... ४१५ - ९
श्रुति द्वारा विनियुक्त कर्मविशेषोंका प्रतिपादन ... ... ४२३ - ५
विद्यार्थकर्मोंमें त्रैवर्णिकोंके अधिकारका निरूपण ... ... ४३१ - १
विद्यार्थकर्मोंमें शूद्रके अनधिकारका कथन ... ... ४३५ - ८
संन्यासकी विद्योपयोगिताका निरूपण ... ... ४४१ - ८
श्रवण आदिमें क्षत्रिय और वैश्योंके अधिकारका कथन ... ४४६ - ५
अमुख्य अधिकारी द्वारा किये गये कर्मोंकी जन्मान्तरीय विद्यामें उपयोगिता ... ... ... ... ४५५ - ६
विद्योपयोगी योगमार्गका निरूपण ... ... ४६० - ८
ब्रह्मसाक्षात्कारमें करण-विचार ... ... ... ४६७ - ८
ब्रह्मसाक्षात्कारमें शाब्दापरोक्षत्वका विचार ... ... ४७४ - ५
अज्ञानके निवर्तकका निरूपण ... ... ... ४८४ - ८
ब्रह्मज्ञानके विनाशकका विचार ... ... ... ५०३ - ४

चतुर्थ परिच्छेद [ पृ० ५११-५५० ]

अविद्यालेशका निरूपण ... ... ... ५११ - ८
अविद्यानिवृत्तिके स्वरूपका विचार ... ... ... ५१४ - १०
मोक्षके स्वतःपुरुषार्थत्वका विचार ... ... ... ५२५ - ९
मोक्षके प्राप्यत्व और अप्राप्यत्व का विचार ... ... ५२९ - १
मुक्तके स्वरूपका विचार ... ... ... ५३३ - ८

इति ।