भारतकोश
सिद्धान्तलेशसंग्रह (अप्पय्य दीक्षित - हिन्दी अनुवाद व व्याख्या)

सिद्धान्तलेशसंग्रह (अप्पय्य दीक्षित - हिन्दी अनुवाद व व्याख्या)

Siddhanta Lesha Sangraha Hindi

श्रीमदप्पय्य दीक्षित द्वारा

स्रोत: Siddhanta Lesha Sangraha of Appayya Dikshita with Hindi Bhashya (उद्गम)

DevanagariHindipublished590 पृष्ठ

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५५२सिद्धान्तलेशसंग्रह[ चतुर्थ परिच्छेद

मुक्तार्थपरत्वेन व्याकुर्वन् भाष्यकारश्च मुक्तस्येश्वरभावापत्तिं स्पष्टमनुमेने । भामतीनिबन्धप्रभृतयश्च श्रुत्युपबृंहितमिदं सूत्रजातं भगवतो भाष्यकारस्योदाहृतं वचनजातं च तथैवान्ववर्तन्त । न च श्रुत्युपबृंहितस्यैतावतः सूत्रभाष्यवचनजातस्य—

ऐश्वर्यमज्ञानतिरोहितं सद् ध्यानादभिव्यज्यत इत्यवोचत् ।
शरीरिणः सूत्रकृदस्य यत्तु तदभ्युपेत्योदितमुक्तहेतोः ॥ अ. ३ श्लो. १७५

इति संक्षेपशारीरकोक्तरीत्याऽभ्युपेत्यवादत्वं युक्तं वक्तुम् ।

तस्मान्मुक्तानामीश्वरभावापत्तेरवश्याभ्युपेयत्वादेतदसम्भव एव प्रतिबिम्बेश्वरवादे दोषः । तदाहुः कल्पतरुकाराः—'न मायाप्रतिबिम्बस्य


इन तीनों सूत्रोंकी तथोक्त अर्थोंके बोधनमें ही शक्ति है, ऐसी व्याख्या करनेवाले भाष्यकारने भी मुक्तकी ईश्वरभावापत्ति स्पष्ट बतलाई है । भामती आदि निबन्धकारोंने श्रुतिसे प्रमाणित उन सूत्रोंका और भगवान् भाष्यकारके उदाहृत वाक्योंका ही अनुसरण किया है । और † श्रुति प्रमाणोंसे उपबृंहित उक्त अनेक सूत्रकार और भाष्यकारके वचनोंको—'ऐश्वर्यज्ञान०' ‡ इत्यादि संक्षेपशारीरकके कथनानुसार—अभ्युपेतवाद भी नहीं मान सकते हैं ।

इससे * मुक्तोंकी ईश्वरभावापत्ति अवश्य स्वीकार्य है, अतः प्रतिबिम्बको ईश्वर माननेवालोंके पक्षमें इसका असम्भव दोष है ही । कल्पतरुकारने इसे कहा भी है—मायाप्रतिबिम्बित ईश्वरकी मुक्तों द्वारा प्राप्यता नहीं हो सकती


† यदि शङ्का हो कि ब्रह्मसूत्रोंके चार अध्यायोंके यद्यपि सूत्रोंसे और भाष्यकारके वचनोंसे मुक्तकी ईश्वरभावापत्ति ज्ञात होती है तथापि संक्षेपशारीरकके वचनके साथ विरोध होता है, अतः उक्त वाक्योंमें उपचरितार्थता ही मानना युक्त है, तो यह भी युक्त नहीं है, क्योंकि उन सूत्रोंके जबरदस्त प्रमाण होनेके कारण संक्षेपशारीरककी उक्तिको ही गौण मानना युक्त है ।

‡ इस वचनका यह अर्थ है—सूत्रकारने जो 'पराभिध्यानात्तु' इस सूत्रसे शरीरी जीवका ऐश्वर्य, जो अज्ञानसे तिरोहित है, वह ईश्वरके स्वरूपके ध्यानसे अभिव्यक्त होता है, ऐसा कहा है, वह अभ्युपेतमवादसे अर्थात् एकदेशीरीतिसे कहा है ।

* इससे अर्थात् उक्त प्रमाणोंके आधारसे, यह भाव है ।