संक्षिप्त स्कन्द पुराण

संक्षिप्त स्कन्द पुराण
Skanda Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
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$[ १८ ]
| विषय | पृष्ठ-संख्या | विषय | पृष्ठ-संख्या |
|---|---|---|---|
| ७४. कुतियाका दिव्य देहको प्राप्त होना ............. | ५०६ | ९८. लोपामुद्राके चरण-चिह्नोंको देखकर देवताओंका नमस्कार करना ....................................... | ७२० |
| ७५. शेषनागजीका लक्ष्मणजीके सामने प्रकट होना | ५११ | ९९. लक्ष्मीजीका लोपामुद्राको हृदयसे लगाना ...... | ७२५ |
| ७६. भगवान् रामद्वारा सीताकुण्डका माहात्म्य-कथन . | ५१७ | १००. शिवशर्माका सूर्यलोकमें पहुँचना .................. | ७३३ |
| ७७. भगवान् सूर्यका राजा घोषके सामने प्रकट होना.. | ५२५ | १०१. शिवजीका बालक गृहपतिकी इन्द्रके वज्रसे रक्षा करना ............................................. | ७४२ |
| ७८. वानरोंका समुद्रपर पुल बाँधना ..................... | ५३५ | १०२. शुक्राचार्यद्वारा भगवान् शंकरका स्तवन ......... | ७४७ |
| ७९. व्यासजीका शुकदेवजीको जटातीर्थमें स्नान करनेके लिये भेजना ................................. | ५४८ | १०३. ध्रुवका माता सुनीतिके सामने फूट-फूटकर रोना ..................................................... | ७५२ |
| ८०. सुचरित मुनिके सामने भगवान् शंकरका अर्ध-नारीश्वररूपमें प्रकट होना ........................ | ५५८ | १०४. भगवान् नारायणका ध्रुवको वरदान देना ....... | ७६० |
| ८१. वेताल-बाधासे मुक्त ब्राह्मणका दत्तात्रेयजीसे संवाद .................................................... | ५६८ | १०५. भगवान् विष्णुका अपने चक्रसे पुष्करिणी खोदना .................................................... | ७६७ |
| ८२. राजा पुण्यनिधिके सामने लक्ष्मीनारायणका प्राकट्य ................................................ | ५९३ | १०६. पार्वतीजीकी महादेवजीसे हरिकेशको वर देनेके लिये प्रार्थना ..................................... | ७९९ |
| ८३. धर्मकी तपस्यामें विघ्न डालनेके लिये वर्द्धिनी अप्सराका उपस्थित होना ........................... | ६०४ | १०७. काशी-गमनके लिये कलावतीका अपने पतिसे प्रार्थना करना ............................................. | ८०५ |
| ८४. अतिथि-सत्कार .......................................... | ६१३ | १०८. रिपुंजयको ब्रह्माजीका दर्शन देना .................... | ८१३ |
| ८५. वैश्योंकी उत्पत्ति ....................................... | ६२२ | १०९. सुलक्षणाकी बकरीपर अनुग्रह करनेके लिये शिवजीसे प्रार्थना ..................................... | ८३१ |
| ८६. वसिष्ठजीके द्वारा भगवान् रामके प्रति भिन्न-भिन्न तीर्थोंकी महिमाका वर्णन .................. | ६३६ | ११०. सूर्यदेवके सामने भगवान् शंकरका प्राकट्य ... | ८३३ |
| ८७. भगवान् रामका अबलाको दुःखी देखकर द्रवित होना ............................................... | ६३९ | १११. विमलादित्यको भगवान् सूर्यके दर्शन ........... | ८४० |
| ८८. नारदजीका ब्रह्माजीसे चातुर्मास्य-व्रतका माहात्म्य पूछना ........................................ | ६४६ | ११२. कपर्दीका शिव-नाम-संकीर्तन करना ........... | ८४३ |
| ८९. गालवमुनिद्वारा शालग्रामपूजनका माहात्म्य-कथन ........................................ | ६५७ | ११३. धर्मक्षेत्रतीर्थमें पुण्यकीर्तिरूपधारी भगवान्का उपदेश देना ............................................ | ८४७ |
| ९०. भगवान् विष्णुकी पार्वतीजीसे क्षमा-याचना .... | ६६० | ११४. रिपुंजयके सामने शिव-पार्षदोंसे घिरे हुए दिव्य विमानका अवतरण ................................... | ८४९ |
| ९१. कार्तिकेयजीकी क्रौंचपर्वतपर भीषण तपस्या ... | ६६८ | ११५. अग्निविन्दुके सामने लक्ष्मीसहित भगवान् विष्णुका प्राकट्य ......................................... | ८५२ |
| ९२. शिवदूतोंका चाण्डालिनीको दिव्यतेजसे सम्पन्न करना ........................................ | ६७६ | ११६. लीलाकमलका स्पर्श पाते ही जैगीषव्यका उल्लसित हो उठना .................................. | ८५७ |
| ९३. विदर्भराजकी पत्नीका ग्राहद्वारा पकड़ा जाना .. | ६८१ | ११७. भगवान् शिवका व्याघ्ररूपधारी दैत्यका वध करना ............................................... | ८६२ |
| ९४. अपनी कन्या सीमन्तिनीका भविष्य सुनकर चित्रवर्माका चिन्तामें डूब जाना ................... | ६८८ | ११८. पार्वतीजीका भगवान् शंकरसे रत्नेश्वर लिंगका स्वरूप एवं प्रभाव पूछना ............................ | ८६५ |
| ९५. भद्रायु और रानीका शिवयोगीकी पूजा करना. | ६९६ | ११९. नन्दीकी भगवान् शंकरसे सेवाके लिये प्रार्थना ................................................... | ८६९ |
| ९६. भद्रायुका व्याघ्रपर तीखे बाणोंकी वर्षा करना. | ७०३ | ||
| ९७. नैध्रुवका शारदाके प्रति उमा-महेश्वरव्रतकी महिमा-कथन ........................................ | ७१२ |
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