भारतकोश
संक्षिप्त स्कन्द पुराण

संक्षिप्त स्कन्द पुराण

Skanda Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

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विषयपृष्ठ-संख्याविषयपृष्ठ-संख्या
७४. कुतियाका दिव्य देहको प्राप्त होना .............५०६९८. लोपामुद्राके चरण-चिह्नोंको देखकर देवताओंका नमस्कार करना .......................................७२०
७५. शेषनागजीका लक्ष्मणजीके सामने प्रकट होना५११९९. लक्ष्मीजीका लोपामुद्राको हृदयसे लगाना ......७२५
७६. भगवान् रामद्वारा सीताकुण्डका माहात्म्य-कथन .५१७१००. शिवशर्माका सूर्यलोकमें पहुँचना ..................७३३
७७. भगवान् सूर्यका राजा घोषके सामने प्रकट होना..५२५१०१. शिवजीका बालक गृहपतिकी इन्द्रके वज्रसे रक्षा करना .............................................७४२
७८. वानरोंका समुद्रपर पुल बाँधना .....................५३५१०२. शुक्राचार्यद्वारा भगवान् शंकरका स्तवन .........७४७
७९. व्यासजीका शुकदेवजीको जटातीर्थमें स्नान करनेके लिये भेजना .................................५४८१०३. ध्रुवका माता सुनीतिके सामने फूट-फूटकर रोना .....................................................७५२
८०. सुचरित मुनिके सामने भगवान् शंकरका अर्ध-नारीश्वररूपमें प्रकट होना ........................५५८१०४. भगवान् नारायणका ध्रुवको वरदान देना .......७६०
८१. वेताल-बाधासे मुक्त ब्राह्मणका दत्तात्रेयजीसे संवाद ....................................................५६८१०५. भगवान् विष्णुका अपने चक्रसे पुष्करिणी खोदना ....................................................७६७
८२. राजा पुण्यनिधिके सामने लक्ष्मीनारायणका प्राकट्य ................................................५९३१०६. पार्वतीजीकी महादेवजीसे हरिकेशको वर देनेके लिये प्रार्थना .....................................७९९
८३. धर्मकी तपस्यामें विघ्न डालनेके लिये वर्द्धिनी अप्सराका उपस्थित होना ...........................६०४१०७. काशी-गमनके लिये कलावतीका अपने पतिसे प्रार्थना करना .............................................८०५
८४. अतिथि-सत्कार ..........................................६१३१०८. रिपुंजयको ब्रह्माजीका दर्शन देना ....................८१३
८५. वैश्योंकी उत्पत्ति .......................................६२२१०९. सुलक्षणाकी बकरीपर अनुग्रह करनेके लिये शिवजीसे प्रार्थना .....................................८३१
८६. वसिष्ठजीके द्वारा भगवान् रामके प्रति भिन्न-भिन्न तीर्थोंकी महिमाका वर्णन ..................६३६११०. सूर्यदेवके सामने भगवान् शंकरका प्राकट्य ...८३३
८७. भगवान् रामका अबलाको दुःखी देखकर द्रवित होना ...............................................६३९१११. विमलादित्यको भगवान् सूर्यके दर्शन ...........८४०
८८. नारदजीका ब्रह्माजीसे चातुर्मास्य-व्रतका माहात्म्य पूछना ........................................६४६११२. कपर्दीका शिव-नाम-संकीर्तन करना ...........८४३
८९. गालवमुनिद्वारा शालग्रामपूजनका माहात्म्य-कथन ........................................६५७११३. धर्मक्षेत्रतीर्थमें पुण्यकीर्तिरूपधारी भगवान्‌का उपदेश देना ............................................८४७
९०. भगवान् विष्णुकी पार्वतीजीसे क्षमा-याचना ....६६०११४. रिपुंजयके सामने शिव-पार्षदोंसे घिरे हुए दिव्य विमानका अवतरण ...................................८४९
९१. कार्तिकेयजीकी क्रौंचपर्वतपर भीषण तपस्या ...६६८११५. अग्निविन्दुके सामने लक्ष्मीसहित भगवान् विष्णुका प्राकट्य .........................................८५२
९२. शिवदूतोंका चाण्डालिनीको दिव्यतेजसे सम्पन्न करना ........................................६७६११६. लीलाकमलका स्पर्श पाते ही जैगीषव्यका उल्लसित हो उठना ..................................८५७
९३. विदर्भराजकी पत्नीका ग्राहद्वारा पकड़ा जाना ..६८१११७. भगवान् शिवका व्याघ्ररूपधारी दैत्यका वध करना ...............................................८६२
९४. अपनी कन्या सीमन्तिनीका भविष्य सुनकर चित्रवर्माका चिन्तामें डूब जाना ...................६८८११८. पार्वतीजीका भगवान् शंकरसे रत्नेश्वर लिंगका स्वरूप एवं प्रभाव पूछना ............................८६५
९५. भद्रायु और रानीका शिवयोगीकी पूजा करना.६९६११९. नन्दीकी भगवान् शंकरसे सेवाके लिये प्रार्थना ...................................................८६९
९६. भद्रायुका व्याघ्रपर तीखे बाणोंकी वर्षा करना.७०३
९७. नैध्रुवका शारदाके प्रति उमा-महेश्वरव्रतकी महिमा-कथन ........................................७१२

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