भारतकोश
संक्षिप्त स्कन्द पुराण

संक्षिप्त स्कन्द पुराण

Skanda Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

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पृष्ठ 263

२३४ * संक्षिप्त स्कन्दपुराण *

पलाशी नामक दैत्योंको क्षणभरमें मौतके घाट उतार दिया था।'

तत्पश्चात् यादवेन्द्र श्रीकृष्णने घटोत्कचके पुत्रसे कहा—वत्स! भीष्म, द्रोण, कृप, अश्वत्थामा, कर्ण और दुर्योधन आदि महारथियोंके द्वारा सुरक्षित कौरवसेनाको, जिसपर विजय पाना महादेवजीके लिये भी कठिन है, तुम इतना शीघ्र कैसे मार सकते हो? तुम्हारे पास ऐसा कौन-सा उपाय है? समस्त प्राणियोंके अधीश्वर भगवान् वासुदेवके इस प्रकार पूछनेपर सिंहके समान वक्षःस्थल, पर्वताकार शरीर तथा अतुलित बलसे सम्पन्न एवं नाना प्रकारके आभूषणोंसे विभूषित बर्बरीकने तुरंत ही धनुष चढ़ाया और उसपर बाण सन्धान किया। फिर उस बाणको उसने लाल रंगके भस्मसे भर दिया और कानतक खींचकर छोड़ दिया। उस बाणके मुखसे जो भस्म उड़ा, वह दोनों सेनाओंमें सैनिकोंके मर्मस्थलोंपर गिरा। केवल पाँच पाण्डव, कृपाचार्य और अश्वत्थामाके शरीरसे उसका स्पर्श नहीं हुआ। यह कर्म करके बर्बरीकने पुनः सब लोगोंसे कहा—'आपलोगोंने देखा, इस क्रियाके द्वारा मैंने मरनेवाले वीरोंके मर्मस्थानका निरीक्षण किया है। अब उन्हीं मर्मस्थानोंमें देवीके दिये हुए तीक्ष्ण और अमोघ बाण मारूँगा, जिनसे ये सभी योद्धा क्षणभरमें मृत्युको प्राप्त हो जायँगे। आप सब लोगोंको अपने-अपने धर्मकी सौगन्ध है, कदापि शस्त्र ग्रहण न करें। मैं दो ही घड़ीमें इन सब शत्रुओंको तीखे बाणोंसे मार गिराऊँगा।'

यह सुनकर युधिष्ठिर आदिके चित्तमें बड़ा विस्मय हुआ। वे सब लोग बर्बरीकको साधुवाद देने लगे, जिससे महान् कोलाहल छा गया। बर्बरीकने ज्यों ही उपर्युक्त बात कही त्यों ही श्रीकृष्णने कुपित होकर अपने तीखे चक्रसे बर्बरीकका मस्तक काट गिराया। यह देख सबको बड़ा आश्चर्य हुआ। सब एक-दूसरेसे कहने लगे—'अहो! यह क्या हुआ? घटोत्कचका पुत्र कैसे मारा गया?' पाण्डव भी अन्य सब राजाओंके साथ आँसू बहाने लगे! घटोत्कच तो 'हा पुत्र! हा पुत्र!' कहता हुआ शोकसे मूर्च्छित होकर गिर पड़ा। इसी समय सिद्धाम्बिका आदि चौदह देवियाँ वहाँ आ पहुँचीं। श्रीचण्डिकाने घटोत्कचको सान्त्वना देकर उच्चस्वरसे कहा—'सब राजा सुनें। विदितात्मा भगवान् श्रीकृष्णने महाबली बर्बरीकका वध किस कारणसे किया है, वह मैं बतलाती हूँ। पूर्वकालकी बात है, मेरुपर्वतके शिखरपर सब देवता एकत्र हुए थे। उस समय भारसे पीड़ित हुई यह पृथ्वी वहाँ गयी और सब देवताओंसे बोली—'आपलोग मेरा भार उतारें।' तब ब्रह्माजीने भगवान् विष्णुसे कहा—'भगवन्! आप मेरी प्रार्थना सुनें। आप ही पृथ्वीका भार उतारें, इस कार्यमें देवता आपका अनुसरण करेंगे।' तब भगवान् विष्णुने 'तथास्तु' कहकर ब्रह्माजीकी प्रार्थना स्वीकार कर ली। इसी समय 'सूर्यवर्चा' नामक यक्षराजने