भारतकोश
संक्षिप्त स्कन्द पुराण

संक्षिप्त स्कन्द पुराण

Skanda Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished1,406 पृष्ठ

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पृष्ठ 262

* माहेश्वरखण्ड-कुमारिकाखण्ड * २३३

बर्बरीकका वध तथा उसके पूर्वजन्मके वृत्तान्तका वर्णन और ग्रन्थका उपसंहार

सूतजी कहते हैं—तदनन्तर पाण्डवोंके वनवासका तेरहवाँ वर्ष व्यतीत हो जानेपर जब 'उपप्लव्य' नामक स्थानमें सब राजा युद्धके लिये एकत्र हो गये, तब महारथी पाण्डव भी युद्ध करनेके लिये कुरुक्षेत्रमें आकर स्थित हुए। दुर्योधन आदि कौरव भी वहाँ पहलेसे ही टिके हुए थे। उस समय भीष्मजीने रथियों और अतिरथियोंकी गणना की थी। उसका सब समाचार गुप्तचरोंद्वारा सुनकर राजा युधिष्ठिरने अपने पक्षके राजाओंके बीच भगवान् श्रीकृष्णसे कहा—'देवकीनन्दन! पितामह भीष्मने रथियों और अतिरथियोंका वर्णन किया है, उसे सुनकर दुर्योधनने अपने पक्षके महारथियोंसे पूछा है कि 'कौन वीर कितने समयमें सेनासहित पाण्डवोंका वध कर सकता है?' इसके उत्तरमें पितामह भीष्म तथा कृपाचार्यने एक मासमें हम सबको मारनेकी प्रतिज्ञा की है। द्रोणाचार्यने पन्द्रह दिनोंमें, अश्वत्थामाने दस दिनमें तथा सदा मुझे भयभीत करनेवाले कर्णने छः दिनमें सेनासहित पाण्डवोंको मारनेकी घोषणा की है। अतः यही प्रश्न मैं अपने पक्षके महारथियोंके सामने रखता हूँ—'कौन कितने समयमें सेनासहित कौरवोंको मार सकता है?'

राजा युधिष्ठिरका यह वचन सुनकर अर्जुन बोले—महाराज! भीष्म आदि महारथियोंने जो प्रतिज्ञा या घोषणा की है वह सर्वथा असंगत है; क्योंकि विजय और पराजयमें पहलेसे किया हुआ निश्चय झूठा होता है। आपके पक्षमें भी जो वीर राजा हैं, वे युद्धके लिये कमर कसकर रणभूमिमें डटे हुए हैं। देखिये—ये नरश्रेष्ठ कालके समान दुर्धर्ष हैं—द्रुपद, विराट, कैकेय, सहदेव, सात्यकि, दुर्जय वीर चेकितान, धृष्टद्युम्न, पुत्रसहित महापराक्रमी घटोत्कच, महाधनुर्धर भीमसेन आदि तथा कभी किसीसे परास्त न होनेवाले भगवान् श्रीकृष्ण—ये सब आपके पक्षमें हैं। मैं तो समझता हूँ, इनमेंसे एक-एक वीर सारी कौरवसेनाका संहार कर सकता है। इनके डरसे कौरव इस प्रकार भागेंगे जैसे सिंहसे डरे हुए मृग। बूढ़े भीष्मसे, बूढ़े बाबा द्रोण और कृपसे तथा अश्वत्थामासे अपनेको क्या भय है? अथवा यदि चित्तकी शान्तिके लिये आप जानना ही चाहते हैं, तो मेरी बात सुनिये—मैं अकेला ही युद्धमें सेनासहित समस्त कौरवोंको एक दिनमें नष्ट कर सकता हूँ।

अर्जुनकी यह बात सुनकर घटोत्कचके पुत्रने हँसते हुए कहा—महात्मा अर्जुनने जो प्रतिज्ञा की है, वह मुझे नहीं सही जाती, क्योंकि इनके द्वारा दूसरे वीरोंपर महान् आक्षेप हो रहा है। अतः अर्जुन और श्रीकृष्णसहित आप सब लोग चुपचाप खड़े रहें, मैं एक ही मुहूर्तमें भीष्म आदि सबको यमलोकमें पहुँचा दूँगा। मेरे भयंकर धनुषको, इन दोनों अक्षय तूणीरोंको तथा भगवती सिद्धाम्बिकाके दिये हुए इस खड्गको भी आपलोग देखें। ऐसी दिव्य वस्तुएँ मेरे पास हैं। तभी मैं इस प्रकार सबको जीतनेकी बात कहता हूँ। बर्बरीकका यह वचन सुनकर सब क्षत्रिय बड़े विस्मयको प्राप्त हुए। अर्जुनने भी आक्षेप करनेके कारण लज्जित हो श्रीकृष्णकी ओर देखा। तब श्रीकृष्णने कहा—'पार्थ! घटोत्कचके इस पुत्रने अपनी शक्तिके अनुरूप ही बात कही है। इसके विषयमें बड़ी अद्भुत बातें सुनी जाती हैं। पूर्वकालमें इसने पातालमें जाकर नौ करोड़