भारतकोश
संक्षिप्त स्कन्द पुराण

संक्षिप्त स्कन्द पुराण

Skanda Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished1,406 पृष्ठ

पृष्ठ 275, कुल 1406 में से

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पृष्ठ 275

२४६ * संक्षिप्त स्कन्दपुराण *

डँसते हैं। शस्त्रोंसे काटकर टुकड़े-टुकड़े कर देते हैं, देहको आगमें डालकर जलाते हैं, गहरे गड्ढेमें गाड़ते हैं, ऊपरसे कोड़ोंसे पीटते हैं, खौलते हुए तेलके कड़ाहेमें पकाते हैं तथा महीन सूइयोंसे छेद-छेदकर पीड़ा पहुँचाते हैं। यमदूत पापियोंसे ऐसे बड़े-बड़े भार ढुलवाते हैं, जिनको ढोना बहुत ही कठिन है। भगवान् विष्णुसे वैर करनेवाला मनुष्य गिरगिट और शिवद्रोही पुरुष मर्कट (वानर) होता है। इस प्रकार पापोंका फल जानकर उसकी शान्तिके लिये प्रायश्चित्त करना चाहिये। आस्तिक पुरुषोंको इस 'अरुण' क्षेत्रमें ही पापोंका भलीभाँति प्रायश्चित्त करना उचित है।

अब मैं पापपूर्ण चित्तवाले समस्त प्राणियोंकी शुद्धिके लिये विस्तारपूर्वक प्रायश्चित्तका वर्णन करता हूँ— ब्रह्मघाती मनुष्य अरुणाचलक्षेत्रमें जाकर कद्रूतीर्थमें गोता लगावे और भस्म एवं रुद्राक्ष धारण करके पंचाक्षरमन्त्रका जप करते हुए उपवास करे, मन और इन्द्रियोंको संयममें रखकर परमेश्वर भगवान् शिवकी पूजा करे और ब्राह्मणोंको भोजन करावे। तत्पश्चात् एक वर्षतक भिक्षाके अन्नपर निर्वाह करते हुए जितेन्द्रियभावसे वहाँ रहे और भगवान् अरुणाचलका भक्तिपूर्वक विशेष पूजन करे। ऐसा करनेवाला पुरुष ब्रह्महत्यासे मुक्त हो ब्रह्मलोकमें सम्मानित होता है। मदिरा पीनेवाला मनुष्य भी अरुणक्षेत्रमें एक वर्षतक विशुद्ध आचार-विचारसे रहे और महादेवजीकी पूजा करके शतरुद्रियका पाठ करते हुए उन्हें दूधसे नहलावे। ऐसा करनेपर वह मदिरापानजनित पापसे शीघ्र मुक्त हो जाता है। सुवर्णकी चोरी करनेवाला पातकी अरुणक्षेत्रमें महादेवजीकी बिल्वपत्रोंसे पूजा करके यदि ब्राह्मणोंको भोजन करावे तो उस दुस्तर पापसे छुटकारा पा जाता है। गुरुपत्नीगामी पुरुष अरुणाचलमें जाकर भक्तिपूर्वक व्रतका पालन करते हुए प्रतिदिन षडक्षर मन्त्रका जप करे तो उस पापसे मुक्त हो जाता है। परायी स्त्रीका अपहरण करनेवाला मनुष्य अरुणाचल-क्षेत्रमें जितेन्द्रियभावसे निवास करे और एक मासतक प्रतिदिन नये-नये फूलोंसे अरुण शिवकी पूजा करे तथा शक्तिके अनुसार धनका दान करे, तो वह तत्काल पापमुक्त हो जायगा। जहर देनेवाला मनुष्य भी अरुण-क्षेत्रमें पूर्वोक्त रीतिसे व्रतका पालन करते हुए निवास करे और महादेवजीको सब प्रकारके उपहार भेंट करे तो वह उस दोषसे छूट जाता है। चुगलीका पाप करनेवाला भी अरुण-क्षेत्रमें व्रती होकर वेदोक्त कर्ममें तत्पर रहते हुए यदि श्रेष्ठ ब्राह्मणोंको पढ़ावे या पढ़नेमें सहायता करे तो वह पापरहित हो जाता है। स्त्री, बालक और गायकी हत्या करनेवाला पुरुष भी अरुण-क्षेत्रमें जाकर अपने पापका नाश करनेके लिये व्यतीपात-योगमें ब्राह्मणोंको तिल दान करे। छिपे पाप करनेवाला भी यदि अरुण-क्षेत्रमें इन्द्रियसंयमपूर्वक गुप्तदान करे तो निष्पाप हो जाता है। असत्यवादी मनुष्य अरुणक्षेत्रमें छः महीनेतक निवास करके प्रतिदिन अरुणाचलेश्वर-स्तोत्रका पाठ करनेसे पापरहित हो जाता है। घरका अपहरण करनेवाला मनुष्य नूतन शिवमन्दिर बनवा दे, तो शीघ्र ही पापसे मुक्त हो भगवान् शिवके सायुज्यको प्राप्त होता है। यदि किसी अभीष्ट वस्तुके लिये प्रार्थना करनी हो, तो पैदल चलकर ही भगवान् अरुणाचलकी प्रदक्षिणा करे; इससे वह शुभ अभीष्ट अनायास ही प्राप्त हो सकता है। छींक आनेपर, पाँव लड़खड़ानेपर, परवश होनेपर, बुरे सपने देखनेपर और प्रीतिकी अधिकता होनेपर भी विद्वान् पुरुषोंको भगवान् अरुण-शंकरका नामोच्चारण करना चाहिये। गया, प्रयाग, काशी, पुष्कर तथा सेतुबन्ध तीर्थमें मनुष्योंको जो पुण्य प्राप्त होता है, उससे भी अधिक पुण्य इस अरुण-क्षेत्रमें मिलता है। अरुण-क्षेत्रके समीप किये हुए शास्त्रोक्त सोलह दान द्विगुण फल देनेवाले होते हैं।

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