भारतकोश
संक्षिप्त स्कन्द पुराण

संक्षिप्त स्कन्द पुराण

Skanda Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished1,406 पृष्ठ

पृष्ठ 311, कुल 1406 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 311

२८२ * संक्षिप्त स्कन्दपुराण *

स्त्रियोंको स्नान करनेकी आज्ञा दी। उनकी रानियोंने अस्थिचर्मविशिष्ट ब्राह्मणीको भी सरोवरमें डाल दिया। फिर तो वह जी उठी। उसके शरीरके सभी चिह्न पूर्ववत् प्रकट हो गये। तत्पश्चात् वह मंगलमयी ब्राह्मणी रानियोंके साथ नहाकर सरोवरसे बाहर आयी और तीर्थयात्रासे पुनः लौटे हुए अपने स्वामी ब्राह्मणदेवतासे प्रसन्नतापूर्वक मिली। राजाने भगवान्‌की पूजा करके ब्राह्मणको धन दिया। एक हजार स्वर्णमुद्रा और भाँति-भाँतिके वस्त्र देकर स्वदेश जानेके लिये उन ब्राह्मणदम्पतिको सादर विदा किया। ब्राह्मणने जब अपनी स्त्रीका समाचार और भगवान् वेंकटेश्वरका प्रभाव सुना, तब राजाको आशीर्वाद देकर अपने देशको प्रस्थान किया।

राजा तोण्डमान भगवान् श्रीनिवासजीकी आज्ञाके अनुसार प्रतिदिन सुवर्णमय कमलोंसे उनकी पूजा किया करते थे। एक दिन उन्होंने देखा भगवान्‌के ऊपर मिट्टीका बना हुआ तुलसी-पुष्प चढ़ा हुआ है। इससे विस्मित होकर राजाने पूछा—'भगवन्! ये मिट्टीके कमल और तुलसीपुष्प चढ़ाकर कौन आपकी पूजा करता है?' उनके इस प्रकार पूछनेपर देवाधिदेव भगवान्‌ने स्मरण करके कहा—'मेरा एक भक्त कुम्हार है जो कूर्मग्राममें निवास करता है। वह अपने घरमें मेरी पूजा करता है और मैं उसे स्वीकार करता हूँ।'

भगवान्‌की यह बात सुनकर राजा उस कुम्हारको देखनेके लिये गये और कूर्मपुरमें जाकर उसके घर पहुँचे। राजाको आया देख कुम्हार उन्हें प्रणाम करके आगे खड़ा हो गया; उसका नाम भीम था। राजाने उससे पूछा—'भीम! तुम अपने कुलमें सबसे श्रेष्ठ हो, बताओ भगवान्‌की पूजा किस प्रकार करते हो?' उनके पूछनेपर कुलालने कहा—'महाराज! मैं कभी कोई पूजा नहीं जानता। भला, आपसे किसने कह दिया कि कुम्हार पूजा करता है?'

तोण्डमान बोले—स्वयं भगवान् श्रीनिवासने तुम्हारे पूजनकी बात कही है।

राजाकी बात सुनकर कुम्हारको पूर्वकालमें दिये हुए भगवान्‌के वरदानका स्मरण हो आया। उसने कहा—'महाराज! पहले भगवान् वेंकटेश्वरने मुझे यह वरदान दिया है कि 'जब तुम्हारी की हुई पूजा प्रकाशित हो जायगी, जब राजा तोण्डमान तुम्हारे द्वारपर आ जायेंगे और उनके साथ तुम्हारा संवाद होगा, तब तुम्हें मोक्ष प्राप्त हो जायगा।' यों कहकर पत्नीसहित कुम्हारने वहाँ आये हुए विमानको और उसपर बैठे हुए भगवान् जनार्दनको देखकर उन्हें प्रणाम करते हुए प्राण त्याग दिया तथा राजाधिराज तोण्डमानके देखते-देखते विमानपर बैठकर दिव्यरूप धारण करके दिव्य रूपधारिणी पत्नीके साथ वह भगवान् विष्णुके परमधामको चला गया।'

यह अद्भुत घटना देखकर राजा हर्षमें भरे हुए अपने नगरको आये और अपने श्रीनिवास नामक पुत्रका विधिपूर्वक राज्याभिषेक करके बोले—'वत्स! तुम धर्मपूर्वक सब मनुष्योंका