संक्षिप्त स्कन्द पुराण
Skanda Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें| * वैष्णवखण्ड-मार्गशीर्षमास-माहात्म्य * | ४६१ |
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भोग दस वर्षमें पूरा होता है, वह मथुरामें दस दिनमें ही पूरा हो जाता है। स्वर्ग, पाताल, अन्तरिक्ष तथा मनुष्यलोकमें मथुरापुरीके समान मेरा प्रिय क्षेत्र दूसरा नहीं है।
तीर्थराज प्रयागमें एक हजार वर्षतक निवास करनेसे जो फल प्राप्त होता है, वह मथुरापुरीमें केवल अगहनमें निवास करनेसे मिल जाता है। जिसने कभी मथुरापुरी नहीं देखी है और उसे देखनेकी इच्छा रखता है, उसकी कहीं भी मृत्यु क्यों न हो, वह मथुरामें जन्म लेता है। मेरे प्रिय भक्तो! तुम मथुरापुरीमें निवास करो, निवास करो। वहाँ गोपकन्याओंसे घिरा हुआ मैं सदैव निवास करता हूँ। संसारमें डूबे हुए शिष्यो! मेरी बात सुनो—यदि तुम घनीभूत आनन्द पाना चाहते हो, तो मथुरापुरीमें निवास करो। अहो! यह संसार बड़ा अंधा है, आँखें होते हुए भी नहीं देखता। मुक्तिदायिनी मथुराके होते हुए भी सदा जन्म-मरणरूपी संसार-चक्रका ही सेवन करता है। सौभाग्यवश अनुपम मनुष्ययोनि पाकर भी जिन्होंने मथुरापुरी नहीं देखी, उनकी आयु व्यर्थ ही बीत गयी। अहो! यह कैसी बुद्धिकी दुर्बलता है, मोहकी कितनी अद्भुत महिमा है कि मनुष्य मथुरापुरीका सेवन नहीं करते। जो मथुरापुरीको पाकर भी अन्यत्र जानेकी अभिलाषा करता है, वह अज्ञानसे ही सम्पन्न है। जो पापकी राशियोंसे आक्रान्त हैं, दरिद्रतासे पराजित हैं और जिनकी कहीं भी गति नहीं है, उन सबके लिये मेरी मथुरापुरी आश्रय है। यह सारसे भी अतिशय सारभूत स्थान है, गोपनीयसे भी अति गोपनीय परम रहस्य है। उत्तम गतिकी खोज करनेवाले पुरुषोंके लिये मथुरापुरी परम गति है। योगयुक्त ब्रह्मज्ञानी मनीषी पुरुषकी जो गति होती है, वही मथुरामें प्राणत्याग करनेवाले मनुष्यकी भी होती है। संसारमें काशी आदि पुरियाँ भी मोक्ष देनेके लिये प्रसिद्ध हैं तथापि उनमें मथुरा ही धन्य है; क्योंकि वह मनुष्योंको चार प्रकारकी मुक्ति प्रदान करती है। मथुरामें आकर मरे हुए कीट, पतंग आदि भी चतुर्भुजरूप हो जाते हैं। मथुरामें जिसे साँप डँस लेता है, जो पशुओंसे मारे जाते हैं, आगमें जलकर या पानीमें डूबकर मरते हैं—इस प्रकार अपमृत्यु पानेवाले लोग भी मेरे लोकमें जाते हैं। जो कामना रखनेवाले पुरुषोंको धर्म, अर्थ और काम देनेवाली है, मनुष्योंको मुक्ति प्रदान करती है और भक्तिकी इच्छा रखनेवालोंको भक्ति देती है, उस मथुराका कौन विद्वान् पुरुष आश्रय नहीं लेगा। ऐसी महिमामयी मधुपुरी मार्गशीर्षमासमें सेवन करने योग्य है। मार्गशीर्षमासमें जो पूर्णिमा होती है, उसमें जो पुण्य किया जाता है, वह मुझे अधिक प्रसन्न करनेवाला होता है। पुष्कर और मथुरामें पूर्णिमा तिथिको स्नान अवश्य करना चाहिये। मार्गशीर्षकी पूर्णिमा अनन्त फल देनेवाली है। अतः सब प्रकारके प्रयत्नोंसे उसका आदर करना चाहिये। जो भक्तिपूर्वक मेरे परम प्रिय मार्गशीर्षमासका व्रत करता है, वह पुत्ररहित हो तो पुत्र पाता है, निर्धन हो तो उसे धन मिलता है, विद्यार्थी हो तो विद्या और रूपार्थी हो तो रूप प्राप्त करता है। ब्राह्मण ब्रह्मतेजको पाता है, क्षत्रिय विजयी होता है, वैश्य खजानेका मालिक होता है और शूद्र पापसे शुद्ध होता है। तीनों लोकोंमें जो दुर्लभ वस्तु है, वह सब मनुष्य मार्गशीर्षमासमें स्नान एवं व्रत करनेसे प्राप्त कर लेता है। मुझको वशमें करनेवाली उत्तम भक्ति सर्वथा दुर्लभ है। वह भी इस मार्गशीर्षमासका माहात्म्य श्रवण करनेपर प्राप्त हो जाती है।
मार्गशीर्षमास-माहात्म्य सम्पूर्ण
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