भारतकोश
संक्षिप्त स्कन्द पुराण

संक्षिप्त स्कन्द पुराण

Skanda Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

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५२६* संक्षिप्त स्कन्दपुराण *

समस्त कामनाओंकी सिद्धि होती है। भादों कृष्णा चतुर्दशीको वहाँकी वार्षिक यात्रा होती है। उससे नैर्ऋत्यकोणमें दुर्भर सरोवर है, जहाँ स्नान करनेसे मनुष्य स्वर्गलोकको प्राप्त करता है। महारत्न और दुर्भर दोनों तीर्थोंमें भक्तिभावसे स्नान करके नीलकण्ठ महादेवजीका गन्ध-पुष्प आदिके द्वारा भलीभाँति पूजन करना चाहिये। पार्वतीसहित भगवान् शिवका ध्यान करके मनुष्य सब कामनाओंको शीघ्र पाकर सदैव शिवलोकमें निवास करता है। भादों कृष्णा चतुर्दशीको जो मनुष्य श्रद्धासहित विधिपूर्वक शिवपूजा तथा ब्राह्मणपूजा विशेषरूपसे करता है, वह शिवलोकमें निवास करता है। भगवान् विष्णु और शिव उसके ऊपर बहुत प्रसन्न होते हैं, जिनके स्मरणमात्रसे मनुष्य सब पापोंसे मुक्त हो जाता है।

दुर्भरस्थानसे ईशान कोणमें महाविद्या नामक महान् तीर्थ है। उसके दर्शनमात्रसे मनुष्योंके हाथमें सब सिद्धियाँ उपस्थित हो जाती हैं। महाविद्याके आगे सरोवरमें स्नान करके जो महाविद्याका श्रद्धा और भक्तिसे दर्शन करता है, वह परम गतिको प्राप्त होता है। वहीं सुप्रसिद्ध सिद्धपीठ है। वहाँ उत्तम भक्तिसे पूजा करनी चाहिये। जो पवित्र मनुष्य वहाँ श्रद्धासे शिव, शक्ति, गणपति तथा भगवान् विष्णुके मन्त्रको एकाग्रचित्त होकर जपता है, उसको सदा सिद्धि प्राप्त होती है। आश्विन शुक्ल पक्षके नवरात्रमें वहाँकी यात्रा करके मनुष्य सब पापोंसे मुक्त हो जाता है। उसके समीप ही क्षीरकुण्डमें दुग्धेश्वर नामसे प्रसिद्ध भगवान् शिव विराजमान हैं। उस क्षीरसंगम कुण्डका सीताजीने बड़ा सत्कार किया है, इसलिये सीताकुण्डके नामसे भी उसकी प्रसिद्धि हुई है। सीताकुण्डमें स्नान करके सीता, राम, लक्ष्मण और दुग्धेश्वरनाथका पूजन करके मनुष्य सब मनोरथोंको पा लेता है। ज्येष्ठ मासकी चतुर्दशीको वहाँकी वार्षिक यात्रा सम्पन्न होती है। वहाँ पूर्व दिशामें सुग्रीवद्वारा निर्मित एक उत्तम तीर्थ है, जो तपोनिधितीर्थके नामसे विख्यात है। उसमें स्नान, दान करके श्रीरामचन्द्रजीका यत्नपूर्वक पूजन करनेसे मनुष्य सम्पूर्ण कामनाओंको प्राप्त कर लेता है। उससे पश्चिम हनुमत्कुण्ड है और हनुमत्कुण्डके पश्चिम विभीषणकुण्ड है। उन दोनोंमें स्नान, दान और श्रीरामचन्द्रजीका पूजन करनेसे मनुष्य सब कामनाओंको प्राप्त कर लेता है।

एक समय विभीषण आदिने मुनिवर वशिष्ठसे विनयपूर्वक पूछा—तपोनिधे! विद्वान् पुरुष अयोध्याका जो सर्वोत्तम माहात्म्य बतलाते हैं, उसका वर्णन कीजिये।

वशिष्ठजीने कहा—यह अयोध्या नामक उत्तम तीर्थ अत्यन्त गुप्त है। यह सदा सभी प्राणियोंके मोक्षका साधक है। इसमें सिद्ध और देवता भी वैष्णवव्रतका आश्रय लेकर नाना प्रकारके वेष धारण किये विष्णुलोककी अभिलाषासे नित्य निवास करते हैं। नाना प्रकारके वृक्षोंसे व्याप्त एवं अनेकानेक विहंगमोंके कलरवसे युक्त इस उत्तम तीर्थमें वे सिद्ध और देवता जितेन्द्रिय हो प्राणायामपूर्वक योगाभ्यास करते हैं। इस उत्तम क्षेत्रमें निवास करना भगवान् विष्णुको सदैव रुचिकर है। जिन्होंने अपने समस्त कर्म भगवान् विष्णुको समर्पित कर दिये हैं, वे विष्णुभक्त यहाँ मोक्ष प्राप्त कर लेते हैं। यहाँ भगवान् विष्णुका निवास है, इसलिये यह अयोध्या नामक महाक्षेत्र अत्यन्त उत्तम है। जो मोक्ष अन्यत्र दुर्लभ माना गया है, वही यहाँ सब सिद्धों और महर्षियोंको प्राप्त होता है। जिसका चित्त विषयोंमें आसक्त है और जिसने धर्मका अनुराग त्याग दिया है, ऐसा मनुष्य भी यदि इस क्षेत्रमें मृत्युको प्राप्त हो तो वह पुनः संसार-बन्धनमें नहीं