संक्षिप्त स्कन्द पुराण
Skanda Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 604, कुल 1406 में से
संदर्भ में पढ़ें* ब्राह्मखण्ड-सेतु-माहात्म्य * ५७५
उच्चारण करता है, उसका पहले दिनका पाप तत्काल नष्ट हो जाता है। यदि प्राणत्यागके समय मनुष्य भगवान् रामेश्वरका स्मरण करे, तो फिर उसका जन्म नहीं होता। 'रामनाथ! महादेव! करुणानिधे! सदा मेरी रक्षा कीजिये।' इस प्रकार जो सदा उच्चारण करता है, वह कलियुगसे पीड़ित नहीं होता*। 'रामनाथ! जगन्नाथ! धूर्जटे! नीललोहित!' जो इस प्रकार सदा बोलता है, उसे माया नही सताती। 'नीलकण्ठ! महादेव! रामेश्वर! सदाशिव!' सदा ऐसा बोलनेवाला प्राणी कभी कामसे कष्ट नहीं पाता। 'हे रामेश्वर! हे यमराजके शत्रु! हे कालकूट विषका भक्षण करनेवाले शिव!' प्रतिदिन इस प्रकार उच्चारण करनेवाला पुरुष कभी क्रोधसे पीड़ित नहीं होता। जो स्फटिक आदि भिन्न-भिन्न शिलाओंसे भगवान् रामेश्वरका मन्दिर बनाता है, वह श्रेष्ठ विमानपर बैठकर भगवान् शिवके लोकको जाता है। जो मनुष्य भक्तिपूर्वक त्रिशूलधारी भगवान् रामेश्वरके स्नानके समयमें रुद्राध्याय, चमक, पुरुषसूक्त, त्रिसुपर्ण, पंचशान्ति तथा पावमानी आदि ऋचाओंको प्रेमपूर्वक जपता है, वह कभी नरकका कष्ट नहीं भोगता है। जो रामेश्वर महालिंगको गायके दूधसे स्नान कराता है, वह अपनी इक्कीस पीढ़ियोंका उद्धार करके शिवलोकमें पूजित होता है। दहीसे स्नान करानेवाला पुरुष सब पापोंसे छूटकर भगवान् विष्णुके लोकमें प्रतिष्ठित होता है। रामेश्वर शिवको नारियलके जलसे कराया हुआ स्नान ब्रह्महत्या आदि पापोंका नाशक बताया गया है। वस्त्रसे छानकर शुद्ध किये हुए जलके द्वारा रामेश्वर महादेवको स्नान करानेवाला पुरुष वरुणलोकमें जाता है। पुष्पोंके सुगन्धसे वासित जलके द्वारा दयानिधान रामेश्वर महालिंगको स्नान करानेवाला मनुष्य शिवलोकमें पूजित होती है। 'रामसेतु धनुष्कोटिमें विराजमान भगवान् रामेश्वर!' ऐसा उच्चारण करके मनुष्य जहाँ कहीं भी स्नान करे, सेतु-स्नानका फल प्राप्त करता है। जो मनुष्य रामेश्वर शिवके टूटे-फूटे हुए मन्दिरको बनाता या उसकी मरम्मत करता है, वह दस सहस्र ब्रह्महत्याओंको जला डालता है। जो मनुष्य भगवान् रामेश्वरके आगे प्रसन्नतापूर्वक दीपक अर्पण करता है, वह अविद्यामय अन्धकारका भेदन करके प्रकाशस्वरूप सनातन ब्रह्मको प्राप्त होता है। भगवान् रामेश्वरके उद्देश्यसे जो थोड़ा भी आदरपूर्वक दान किया जाता है, वह दाताको परलोकमें अनन्त फल देनेवाला होता है। महाक्षेत्र रामेश्वरमें श्रीरामनाथजीके समीप निवास करनेवाला मनुष्य पुनरावृत्तिरहित मोक्षको प्राप्त होता है। संसारका लाड़-प्यार छोड़कर आपत्तिग्रस्त मनुष्योंकी पीड़ा दूर करनेवाले रामेश्वर महालिंगका श्रवण, कीर्तन और स्मरण करना चाहिये। भगवान् रामेश्वरका पूजन, वन्दन, स्मरण, श्रवण और दर्शन कर लेनेपर कोई वस्तु दुर्लभ नहीं रह जाती। जो लाये हुए गंगाजलके द्वारा रामेश्वर नामक महालिंगको स्नान कराता है, वह भगवान् शिवके लिये भी आदरणीय हो जाता है। जबतक मृत्यु नहीं आती, जबतक बुढ़ापाका आक्रमण नहीं होता और जबतक सम्पूर्ण इन्द्रियाँ शिथिल नहीं हो जातीं, तभीतक मोक्ष चाहनेवाले मनुष्योंको सदैव भगवान् रामेश्वरका वन्दन, पूजन, चिन्तन तथा स्तवन कर लेना चाहिये। परम दयालु भगवान् रामेश्वरका जो भक्तिपूर्वक सदा भजन करते हैं, वे इस
* रामनाथ महादेव मां रक्ष करुणानिधे। इति यः सततं ब्रूयात् कलिनासौ न बाध्यते ॥
(स्क० पु०, ब्रा० से० मा० ४३। ७१)