भारतकोश
संक्षिप्त स्कन्द पुराण

संक्षिप्त स्कन्द पुराण

Skanda Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

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पृष्ठ 603

५७४ * संक्षिप्त स्कन्दपुराण *


इसमें सन्देह नहीं है*। रामेश्वर नामक महालिंगमें सब तीर्थ, सम्पूर्ण देवता, ऋषि-मुनि तथा पितर विद्यमान हैं। जो एक समय, दो समय, तीनों समय अथवा सर्वदा ही मोक्षदायक रामेश्वर नामक महादेवजीका स्मरण या कीर्तन करते हैं, वे पापसमूहसे मुक्त हो जाते हैं और सच्चिदानन्दमय अद्वैतरूप साम्बशिवको प्राप्त होते हैं। रामेश्वर नामक शिवलिंग भगवान् श्रीरामचन्द्रजीके द्वारा पूजित हुआ है, उसके स्मरण करनेमात्रसे यमराजकी पीड़ा नहीं प्राप्त होती। जो मनुष्य रामेश्वर नामक महालिंगको नमस्कार और उसका पूजन करते हैं, उनका जन्म सफल है, वे कृतार्थ हो जाते हैं। जो मनुष्य रामेश्वर नामक महालिंगके प्रति भक्ति रखते हैं, उन लोगोंके प्रणाम, स्मरण और पूजनमें तत्पर रहनेवाले मानव भी कभी दुःख नहीं देखते। करोड़ों जन्मोंमें किये गये जो कोई भी पाप हैं, वे भगवान् रामेश्वरका दर्शन कर लेनेपर तत्काल नष्ट हो जाते हैं। रामेश्वर महालिंगका कीर्तन और पूजन करनेवाला मनुष्य अवश्य ही भगवान् रुद्रका सारूप्य प्राप्त कर लेता है। जैसे प्रज्वलित अग्नि क्षणभरमें काष्ठके ढेरको भस्म कर डालती है, वैसे ही भगवान् रामेश्वरका दर्शन करनेवाले लोगोंके सब पाप तत्काल भस्म हो जाते हैं। रामेश्वर महालिंगकी भक्ति आठ प्रकारकी बतायी गयी है—(१) रामेश्वरके भक्तोंके प्रति स्नेह एवं दयाभाव रखना, (२) उन भक्तोंका पूजन करके उन्हें सन्तुष्ट करना, (३) स्वयं भगवान् रामेश्वरकी भक्तिपूर्वक पूजा करना, (४) उन्हींके लिये देहकी सारी चेष्टाओंका होना, (५) श्रीरामेश्वरकी माहात्म्य-कथा श्रवण करनेमें आदरभाव रखना, (६) उनके प्रति प्रेमाधिक्यके कारण वाणीका गद्गद होना, नेत्रोंमें आँसू आना, शरीरमें रोमांचका उदय होना आदि भावोंका स्फुरण, (७) श्रीरामेश्वर महालिंगका निरन्तर स्मरण करना तथा (८) उसीकी शरण लेकर जीवनधारण करना। जिस-किसी म्लेच्छमें भी ऐसी आठ प्रकारकी भक्ति हो, वह भी मुक्तिक्षेत्रोंके मोक्षरूपी धनका अधिकारी बताया गया है। अनन्य भक्ति और ब्रह्मज्ञानके द्वारा मुक्ति निश्चित है। ऊर्ध्वरेता संन्यासियोंको वेदान्तशास्त्रके श्रवणसे जो मुक्ति प्राप्त होती है, वही सब वर्णों और सब आश्रमके लोगोंको दर्शनशास्त्रके श्रवणजनित ज्ञानके बिना ही केवल रामेश्वर महालिंगके दर्शनसे ही प्राप्त हो जाती है। योगयुक्त ऊर्ध्वरेता मुनियोंकी जो गति होती है, वही भगवान् रामेश्वरका दर्शन करनेवाले समस्त प्राणियोंकी होती है। जो मनुष्य रामेश्वर शिवके क्षेत्रकी प्रसन्नतापूर्वक यात्रा करते हैं, उन्हें पग-पगपर अश्वमेध-यज्ञका पुण्य प्राप्त होता है। अम्बा-पार्वतीसहित परम दयालु रामेश्वर महालिंगरूप भगवान् शिवमें भक्ति होनी अत्यन्त दुर्लभ है, उनकी पूजाका शुभ अवसर भी दुर्लभ है तथा उनका स्तवन और स्मरण भी अत्यन्त दुर्लभ है। जिसकी बुद्धि निरन्तर रामेश्वर महालिंगका चिन्तन करती है, वही इस पृथ्वीपर धन्यातिधन्य पुरुष है। श्रीरामेश्वर महालिंगका दर्शन करनेवाले पुरुषके दर्शनमात्रसे दूसरे प्राणियोंका पाप तत्काल नष्ट हो जाता है। जो प्रातःकाल उठकर तीन बार रामनाथ (रामेश्वर) शब्दका


* दशवर्षैस्तु यत्पुण्यं क्रियते तु कृते युगे। त्रेतायामेकवर्षेण तत्पुण्यं साध्यते नृभिः॥
द्वापरे तच्च मासेन तद्दिनेन कलौ युगे। तत्फलं कोटिगुणितं निमिषे निमिषे नृणाम्॥
निस्सन्देहं भवेद्देवं रामनाथविलोकिनाम्॥
(स्क० पु० ब्रा० से० मा० ४३। ३–५)