संक्षिप्त स्कन्द पुराण

संक्षिप्त स्कन्द पुराण
Skanda Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
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॥ श्रीहरिः ॥
विषय-सूची
| विषय | पृष्ठ-संख्या | विषय | पृष्ठ-संख्या |
|---|---|---|---|
| (१) माहेश्वरखण्ड<br>(केदारखण्ड)<br>१. भगवान् शिवकी महिमा, दक्षका शिवजीसे द्वेष तथा दक्ष-यज्ञमें सतीका गमन ............. | १ | १५. देवताओंका तारकासुर और उनकी सेनाके साथ संग्राम तथा कुमार कार्तिकेयद्वारा तारकासुरका वध ......................................................... | ७० |
| २. सतीका अग्नि-प्रवेश, दक्ष-यज्ञ-विध्वंस तथा दक्षपर पुनः भगवान् शिवकी कृपा ............. | ५ | १६. यमराजके द्वारा भगवान् शिवकी स्तुति तथा शिवके द्वारा यमराजको आत्मज्ञानका उपदेश ... | ७४ |
| ३. शिवपूजनकी महिमा ...................................... | १२ | १७. कार्तिकेयजीकी स्तुति और उनके द्वारा पर्वतोंको वरदान तथा महाराज श्वेतका चरित्र ............. | ७७ |
| ४. शिवलिंग-पूजनकी महिमा तथा रावणके उत्कर्ष और पतनका वृत्तान्त ................................. | १३ | १८. शिवरात्रि-व्रतकी महिमा ............................. | ८० |
| ५. गुरुकी अवहेलनासे इन्द्रकी दैत्योंद्वारा पराजय, समुद्र-मन्थन, शंकरजीकी कृपासे कालकूट विषसे सबकी रक्षा, विविध रत्नोंका प्राकट्य तथा लक्ष्मीजीका प्रादुर्भाव .................................................... | १६ | (कुमारिकाखण्ड)<br>१९. पंचाप्सरस्तीर्थमें अर्जुनद्वारा अप्सराओंका उद्धार | ८३ |
| ६. अमृतकी उत्पत्ति, भगवान्का मोहिनीरूपद्वारा देवताओंको अमृत पिलाना, शिवके द्वारा राहुसे चन्द्रमाकी रक्षा तथा शिवके लिये दीपदान, रुद्राक्षधारण और विभूतिधारणका माहात्म्य ...... | २४ | २०. सारस्वत-कात्यायन-संवाद—दान और त्यागकी महिमा ..................................................... | ८६ |
| ७. इन्द्रकी विजय, इन्द्रद्वारा विश्वरूपका वध, नहुषका स्वर्गसे पतन, ब्रह्महत्यासे इन्द्रकी मुक्ति तथा पुनः राज्यकी प्राप्ति ............................................ | २७ | २१. नारदजीके द्वारा धर्मवर्माके दानसम्बन्धी जटिल प्रश्नोंका समाधान ....................................... | ९१ |
| ८. विश्वकर्माके तपसे वृत्रासुरकी उत्पत्ति तथा दधीचिद्वारा देवताओंको अस्थिदान ................... | ३३ | २२. कलाप-ग्रामनिवासी सुतनुद्वारा नारदजीके जटिल प्रश्नोंका समाधान ...................................... | ९९ |
| ९. पिप्पलादका जन्म, सुवर्चाका पतिलोकगमन, देवासुर-संग्राममें नमुचिका वध, प्रदोष-व्रतकी विधि और उद्यापन, इन्द्र और वृत्रासुरका युद्ध तथा इन्द्रकी विजय ...................................... | ३५ | २३. नारदजीके द्वारा कलाप-ग्रामके ब्राह्मणोंको महीसागरसंगममें ले आना और वहाँ उन्हें भूमि आदि देकर पुण्यस्थानकी स्थापना करना ........ | १०७ |
| १०. बलिके द्वारा देवताओंकी पराजय, अदितिके व्रत-तपस्यासे सन्तुष्ट हो भगवान्का वामनरूपमें अवतार, बलिके पूर्वजन्मका प्रसंग तथा बलिपर वामनजीकी कृपा ......................................... | ४२ | २४. लोमशजीका राजा इन्द्रद्युम्नको अपने पूर्वजन्मका चरित्र सुनाकर शिवकी आराधनाका महत्त्व बतलाना ................................................. | ११२ |
| ११. तारकासुरको ब्रह्माजीका वरदान, हिमालयके घर सतीका पार्वतीरूपमें अवतार, शंकरजीके रोषसे कामदेवका भस्म होना तथा पार्वतीकी उग्र तपस्या ..................................................... | ५१ | २५. संवर्तके मुखसे महीसागरसंगमकी महिमा तथा भर्तृयज्ञद्वारा शतरुद्रिय सुनकर शिवकी आराधनासे इन्द्रद्युम्न आदि सब भक्तोंको शिवसारूप्यकी प्राप्ति .................................................... | ११५ |
| १२. देवताओंकी प्रार्थनासे भगवान् शिवका पार्वतीजीके पास जाना और उनके प्रेमकी परीक्षा ले उनकी तपस्याको सफल बनाना .............................. | ५७ | २६. कुमारका अनुताप, भगवान् विष्णुका उन्हें समझाना तथा उनकी सम्मतिसे स्कन्दद्वारा तीन शिवलिंगोंकी स्थापना और भगवान् शिवका वरदान ........... | १२२ |
| १३. सप्तर्षियोंका आगमन, शिवके साथ पार्वतीके विवाहका निश्चय, समस्त देवताओंका शिवकी बारातमें आगमन, हिमवान्द्वारा स्वागत तथा मण्डपमें कन्यादानकी तैयारी .................................... | ६१ | २७. कुमारका विजयस्तम्भ, प्रलम्ब दानवका वध तथा भूगोलका वर्णन ............................... | १३० |
| १४. हिमवान्द्वारा कन्यादान, बारातका भोजन और बिदाई, शिवमहिमा तथा कुमारका जन्म ......... | ६६ | २८. नवग्रहोंकी स्थिति, ऊपरके सात लोकोंका वर्णन, वायुके सात स्कन्ध, सात पाताल, इक्कीस नरक, ब्रह्माण्डकटाह एवं काल-मान आदिका निरूपण | १३५ |
| २९. राजा शतशृंगकी पुत्री कुमारीका चरित्र तथा कुमारीखण्डकी श्रेष्ठता ................................ | १४१ | ||
| ३०. कालभीतिकी तपस्या तथा धर्मनिष्ठा, महाकालका प्रादुर्भाव और कालभीतिपर भगवान् शङ्करकी कृपा .................................................... | १४५ | ||
| ३१. महाकालद्वारा करन्धमके प्रश्नानुसार श्राद्ध तथा युगव्यवस्थाका वर्णन................................... | १५० | ||
| ३२. त्रिदेवोंकी श्रेष्ठता और पापोंके भेद ............. | १५६ | ||
| ३३. शिवपूजाकी विधि तथा सदाचारका निरूपण .. | १६१ |