भारतकोश
संक्षिप्त स्कन्द पुराण

संक्षिप्त स्कन्द पुराण

Skanda Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

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विषयपृष्ठ-संख्याविषयपृष्ठ-संख्या
३४. नारदजीके द्वारा भगवान् वासुदेवकी स्थापना, ऐतरेयका अपनी मातासे संसारदुःखका वर्णन, भगवान्‌का प्रत्यक्ष प्रकट होकर ऐतरेयको वरदान देना तथा वासुदेवके ध्यानसे ऐतरेयकी मुक्ति...१६६( २ ) वैष्णवखण्ड<br>( भूमिवाराहखण्ड या वेंकटाचल-माहात्म्य )<br>५४. मेरुगिरिपर भगवान् वाराहकी सेवामें पृथ्वीदेवीका उपस्थित होना और श्रेष्ठ पर्वतों तथा वेंकटाचलवर्ती तीर्थोंका माहात्म्य सुनना ...........................२६१
३५. भ्रादित्यकी स्थापना तथा नारदजीके द्वारा एक सौ आठ नामोंसे उनकी स्तुति ...................१७९५५. भगवान् वाराहका मन्त्र, उसके जपकी विधि, ध्यान तथा उसके अनुष्ठानका फल .............२६५
३६. महात्मा नन्दभद्रके सारभूत विचार तथा उनके द्वारा सत्यव्रतके नास्तिकतापूर्ण विचारोंका खण्डन१८१५६. महर्षि अगस्त्यकी प्रार्थनासे भगवान् विष्णुका वेंकटाचलपर श्री-भू देवियोंके साथ निवास तथा आकाशराजके यहाँ पद्मावती और वसुदानका जन्म ......................................................२६६
३७. नन्दभद्र और बालकका संवाद, बालादित्यकी स्थापना और नन्दभद्रकी मुक्ति ....................१८७५७. वेंकटाचलनिवासी श्रीहरि और पद्मावतीका विवाह२६८
३८. महीसागरसंगमतीर्थकी रक्षा करनेवाली देवियोंका परिचय .....................................................१९२५८. तोण्डमानको निषादके साथ भगवान् श्रीनिवासका दर्शन होना ...............................................२७६
३९. उभय सोमनाथके प्रादुर्भावकी कथा और कमठके द्वारा गर्भवास तथा मानव-शरीरकी उत्पत्तिका वर्णन ......................................................१९४५९. वाराहभगवान् तथा अस्थिसरोवरतीर्थकी महिमा, भक्त कुम्हार तथा राजा तोण्डमानका परमधाम-गमन .....................................................२८०
४०. कमठद्वारा शरीरकी उत्पत्ति, विनाश तथा जीवके परलोकवासका वर्णन .................................१९८६०. राजा परीक्षित्‌को ब्राह्मणका शाप, तक्षकके काटनेसे उनकी मृत्यु तथा उनकी रक्षा न करनेके पापसे कलंकित काश्यप ब्राह्मणका स्वामिपुष्करिणीमें स्नान करके शुद्ध होना ............................२८४
४१. पापकर्मोंके फल, जयादित्यकी स्तुति और महिमा२०२६१. स्वामीतीर्थकी महिमा और उसमें स्नान करनेसे राजा धर्मगुप्तके शापजनित उन्मादका निवारण.२८७
४२. नारदजीके गुणोंका वर्णन तथा गौतमेश्वरकी महिमाके प्रसंगमें योगका निरूपण ............................२०७६२. कृष्णतीर्थ और भगवान् वेंकटेश्वरका माहात्म्य.२९०
४३. महीसागरसंगमकी श्रेष्ठता तथा उसके गुप्तक्षेत्र होनेका कारण...........................................२१७६३. पापनाशनतीर्थकी महिमा—भद्रमति ब्राह्मणका चरित्र ......................................................२९२
४४. घटोत्कचका विवाह और बर्बरीकका जन्म ......२१९६४. आकाशगंगातीर्थकी महिमा—रामानुजपर भगवान्‌की कृपा तथा भगवद्भक्तोंका लक्षण ...............२९५
४५. बर्बरीक और विजयकी गुप्तक्षेत्रमें साधना तथा पाण्डवोंसे बर्बरीककी भेंट ..........................२२४६५. दान-पात्र-विचार, चक्रतीर्थकी महिमा, पद्मनाभकी तपस्या, भगवान्‌का वरदान तथा राक्षसके आक्रमणसे चक्रद्वारा पद्मनाभकी रक्षा ..........................२९७
४६. बर्बरीकका वध तथा उसके पूर्वजन्मके वृत्तान्तका वर्णन और ग्रन्थका उपसंहार ......................२३३६६. सुन्दर गन्धर्वका वसिष्ठजीके शापसे राक्षसभावको प्राप्त होकर पुनः उससे मुक्त होना .............३००
( अरुणाचल-माहात्म्यखण्ड )<br>४७. भगवान् शंकरका 'अरुणाचल' रूपसे प्रकट होना तथा ब्रह्मा और विष्णुका उनकी स्तुति करना२३८६७. घोणतीर्थका माहात्म्य—गन्धर्वपत्नीका उद्धार ....३०१
४८. शिवके विभिन्न तीर्थोंकी महिमा ..................२४०६८. वेंकटाचलके मुख्य तीर्थोंका वर्णन, पुराणश्रवणकी महिमा और नियम तथा अर्जुनकी तीर्थयात्रा ...३०३
४९. अरुणाचलक्षेत्रकी महिमा, विभिन्न पापोंके फल और उन पापकर्मोंका प्रायश्चित्त ..................२४४६९. अर्जुनका कालहस्तीश्वरके समीप भरद्वाजके आश्रमपर जाना और भरद्वाजजीके द्वारा अगस्त्यजीके प्रभावका वर्णन ........................................३०६
५०. अरुणाचलेश्वरकी पूजा, शिवजीके द्वारा सृष्टिका प्रादुर्भाव तथा विष्णुके द्वारा भगवान् शंकरकी स्तुति .......................................................२४७७०. महर्षि अगस्त्यकी तपस्यासे सुवर्णमुखरी नदीका प्रादुर्भाव और उसका माहात्म्य ..................३०८
५१. शिव-पार्वतीके दाम्पत्यजीवनकी एक झाँकी, पार्वतीकी अरुणाचलक्षेत्रमें तपस्या और दुर्गादेवीके द्वारा शुम्भ, निशुम्भ और महिषासुरका वध ....२४८७१. सुवर्णमुखरी नदीके तीर्थोंका वर्णन, भगवान् विष्णुकी महिमा, प्रलयकालकी स्थिति तथा श्वेतवाराहरूपमें भगवान्‌का प्राकट्य ................................३११
५२. खड्गतीर्थकी उत्पत्ति, ज्योतिदर्शन, पार्वतीपर अरुणाचलेश्वरकी कृपा तथा भगवान् शिवका वरदान .२५३
५३. कान्तिशाली तथा कलाधरका उद्धार, राजा वज्रांगद्वारा अरुणाचलेश्वरकी आराधना तथा भगवान् शिवकी उनके ऊपर कृपा ......................................२५५
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