भारतकोश
संक्षिप्त स्कन्द पुराण

संक्षिप्त स्कन्द पुराण

Skanda Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

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पृष्ठ 957
९२८* संक्षिप्त स्कन्दपुराण *

और मोक्ष देनेवाला होगा।' व्यासजी! इस प्रकार वह शिवलिंग और तीर्थ अत्यन्त दुर्लभ बताया गया है। जो श्रावणमासमें इन्द्रियोंको संयममें रखते हुए प्रतिदिन भगवान् सोमेश्वरका दर्शन करता है, वह प्रतिदिन सौराष्ट्रप्रदेशके ज्योतिर्मय लिंग सोमनाथकी पूजाका फल पाता है।


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नरकोंका संक्षिप्त वर्णन, केदारेश्वर, जटेश्वर, इन्द्रेश्वर, कुण्डेश्वर, गोपेश्वर, आनन्देश्वर तथा रामेश्वरके दर्शन-पूजनका माहात्म्य

सनत्कुमारजी कहते हैं—नरकतीर्थमें स्नान करके भगवान् महेश्वरका दर्शन करनेसे मनुष्यको कभी नरक नहीं देखना पड़ता।

व्यासजीने पूछा—प्रभो! नरक कितने हैं? और किस स्थानपर उनकी स्थिति है? यह बतानेकी कृपा करें।

सनत्कुमारजीने कहा—व्यास! समस्त नरक पाताललोकमें स्थित हैं, जो सदैव दुःख देनेवाले हैं। सब जीव अपने-अपने पुण्योंका नाश होनेसे अपने-अपने कर्मोंके अनुसार अधोगतिको प्राप्त होते हैं। रौरव, शूकर, रौद्र, ताल, विनशक, तप्तकुम्भ, तप्तायस, महाज्वाल, कुम्भीपाक, क्रकचन, अतिदारुण, कृमिभुक्ति, रक्त, लालाभक्ष, गण्डक, अधोमुख, अस्थिभंग, यन्त्र-पीड़नका, सन्दंश, रुधिरांग, असिपत्र और कुभोजन इत्यादि सभी नरक अत्यन्त भयंकर हैं। यमराजके राज्यमें उन सबकी स्थिति है। उनका नाम सुन लेनेमात्रसे अत्यन्त भय हो जाता है। पापकर्मोंमें संलग्न रहनेवाले मनुष्य उनमें गिरते हैं और गिरे हुए जीव अपने कर्मोंके अनुसार उनमें पकाये जाते हैं। भाँति-भाँतिकी यातनाओं द्वारा उनके भयानक पापकर्मोंका क्षय होता है। तपायी हुई लोहेकी साँकलसे मनुष्योंके दोनों हाथ खूब कसकर बाँध दिये जाते हैं और बड़े-बड़े वृक्षोंके शिखरोंपर यमदूत उन्हें लटका देते हैं। वे अपने-अपने कर्मोंके लिये शोक करते हुए चुपचाप लटके रहते हैं और भयंकर यमदूत अग्निके समान कीलों, काँटों और लोह-दण्डोंसे उन पापात्माओंको मारते-पीटते रहते हैं। कभी क्षणभरमें वे आगसे तपाये जाते हैं और कभी काटकर सारे शरीरको जर्जर करके उन्हें सब ओर फेंक दिया जाता है। इस प्रकार उन नरकोंमें यातना दे-देकर पापी पुरुषोंको पकाया जाता है। यह यातना उन्हीं पापियोंको भोगनी पड़ती है, जो बहुत पाप करके उनके लिये कोई प्रायश्चित्त नहीं करते। जिस पुरुषको पाप करनेके बाद उसके लिये बहुत पश्चात्ताप होता है, उसकी पापशुद्धिके लिये एकमात्र भगवान् शिवका स्मरण ही सर्वोत्तम प्रायश्चित्त है। इसलिये दिन-रात पुरुषोत्तम शिवका स्मरण करनेवाला मनुष्य अपने समस्त पापोंका नाश करके शुद्ध हो जाता है, फिर उसे नरकमें नहीं जाना पड़ता।

जो मनुष्य यहाँ समस्त लोकोंमें विख्यात केदारतीर्थमें स्नान करके शुद्ध हो केदारेश्वर महादेवका दर्शन करता है, वह सब पापोंसे मुक्त हो शिवलोकमें परमानन्दका अनुभव करता है। जटाश्रृंगतीर्थमें स्नानसे पवित्र हो जितेन्द्रिय पुरुष यदि जटेश्वर शिवका दर्शन करे, तो वह सब पापोंसे छुटकारा पा जाता है। इन्द्रतीर्थमें स्नान करके इन्द्रेश्वर शिवका दर्शन करनेवाला मनुष्य भी सम्पूर्ण पापोंसे छूटकर इन्द्रलोकमें प्रतिष्ठित होता है। जो शिवजीके ध्यानमें तत्पर हो कुण्डेश्वरका दर्शन करता है, वह शिवदीक्षाका शुभ फल प्राप्त करता है। गोपतीर्थमें स्नान करके गोपेश्वरका दर्शन करनेवाला मनुष्य शिवलोकको जाता है। चिपिटातीर्थमें स्नान करके जो भगवान् शिवको प्रणाम करता है, वह पशु-पक्षियोंकी योनिमें जन्म नहीं लेता। विजयतीर्थमें नहाकर आनन्देश्वरकी पूजा करनेसे समस्त पापोंसे छूटा हुआ मानव स्वर्गलोकमें विजयी होता है।