सौन्दर्यलहरी (आदि शङ्कराचार्य - सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित)
Soundarya Lahari of Shankaracharya Hindi
श्रीमदादि शङ्कराचार्य द्वारा
स्रोत: Soundarya Lahari with Shlokas, Yantras & Hindi Commentary (उद्गम)
पृष्ठ 101, कुल 415 में से
संदर्भ में पढ़ेंसौंदर्य लहरी ६१
( धारण कर रहा है ) और हर उसकी भस्म बनाकर अपने अंग पर लगाते हैं” ॥२॥
[ शक्ति अनन्तता इस श्लोक में दिखाई गई है । उसकी सापेक्षता से ब्रह्मा, शौरि ( शेष ) और हर की शक्तियां तुच्छ हैं, क्योंकि वह अनन्त ब्रह्माण्डों की स्वामिनी है, और ये एक ब्रह्माण्ड के ही अधिदेव हैं । ]
विरिञ्चः या विरञ्चिः ब्रह्मा को कहते हैं, और शौरिः विष्णु का नाम है । शेषशायी नारायण की शय्या बनाने वाला शेष नाग भी नारायण की ही शक्ति का एक रूप है । विष्णु के साथ राम कृष्ण दोनों अवतारों में लक्ष्मण और बलभद्र शेष के अवतार माने जाते हैं । योग दर्शन के सूत्रकार ऋषि पतञ्जलि को भी शेष का ही अवतार कहा जाता है, जिन्होंने शरीर के स्वास्थ्य के लिये चरक संहिता, व्याकरण की शुद्धि के लिये पाणिनि सूत्रों पर महाभाष्य और मनोनिरोध के लिये योग दर्शन की रचना की है । यहां उन शेष को विष्णु का ही एक नाम देकर नामांकित किया गया है ।
| अणुकारणवाद,<br>प्रधानकारणवाद<br>और विवर्तवाद | कणाद के वैशेषिक दर्शन और गौतम के न्याय दर्शन के मतानुसार सृष्टि का उपादान कारण परमाणु हैं, इसीलिये वे अणुवाद के समर्थक हैं। सांख्य और योग दर्शन सृष्टि का उपादान कारण मूल प्रकृति को मानते हैं । मूल प्रकृति को प्रधान और अव्यक्त भी कहते हैं, इसलिये सांख्य और योग दोनों प्रधान कारणवादी हैं, वे अणुवाद का खंडन करते हैं । प्रधान में |