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सौन्दर्यलहरी (आदि शङ्कराचार्य - सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित)

सौन्दर्यलहरी (आदि शङ्कराचार्य - सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित)

Soundarya Lahari of Shankaracharya Hindi

श्रीमदादि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Soundarya Lahari with Shlokas, Yantras & Hindi Commentary (उद्गम)

DevanagariHindipublished415 पृष्ठ

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६० | सौंदर्य लहरी

श्री चक्र — श्री विद्या का स्थूल शरीर श्री चक्र है, जिसमें महात्रिपुर सुंदरी का निवास स्थान है। इसलिये श्री चक्र ब्रह्माण्ड का प्रतीक है और मनुष्य देह भी श्री चक्र ही है। श्री चक्र में चार शिव कोण और पांच शक्ति कोण होते हैं। (देखे श्लोक ११) दोनों के योग से ही सम्पूर्ण चक्र बनता है, इनके योग के अभाव में केवल केन्द्रीय बिन्दुमात्र रह जाता है जो परशिव प्रतीक है।

दूसरे श्लोक में सर्व शक्तिमान परमेश्वर की अनंत शक्ति की महानता दिखाते हैं।

( २ )

"तनीयांसं पांसुं तव चरणपंकेरुहभवं
विरिञ्चिः संचिन्वन्विरचयति लोकानविकलम् ।
वहत्येनं शौरिः कथमपि सहस्रेण शिरसां
हरः संक्षुभ्यैनं भजति भसितोद्धूलनविधिम् ।

तनीयांसं = छोटा, पांसुं = कण

अर्थ — “ तेरे चरण कमल से उत्पन्न होने वाले छोटे से एक रजकण को चुनकर ब्रह्मा बिना विकलता के लोक लोकान्तरों की रचना करता रहता है और शेषनाग उसको जैसे तैसे अर्थात बडे परिश्रम से सहस्र शिरों पर उठा रहा हैं