भारतकोश
सौन्दर्यलहरी (आदि शङ्कराचार्य - सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित)

सौन्दर्यलहरी (आदि शङ्कराचार्य - सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित)

Soundarya Lahari of Shankaracharya Hindi

श्रीमदादि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Soundarya Lahari with Shlokas, Yantras & Hindi Commentary (उद्गम)

DevanagariHindipublished415 पृष्ठ

पृष्ठ 103, कुल 415 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 103

सौंदर्य लहरी ६३

का प्रधान है और वह ही परिणत होकर अणुओं का रूप धारण कर लेती है। आधुनिक विज्ञान वादियों के विद्युदाणुओं (Electrons) को सृष्टि का कारण मानें तो उनके केन्द्रीय (Protons) अणुओं को किसी जडशक्ति (Cosmic Energy) का अणुपरिणाम (granulation) मानना पडेगा, और उस सृजनशक्ति (Cosmic energy) को परमात्मा की आदि इच्छाशक्ति का परिणाम समझना चाहिये।

सर्व शक्तिमान की शक्ति का माप नहीं किया जा सकता, वह

शेष और कुण्डलिनीअनन्त है, और उसकी रचना में अनेक ब्रह्माण्ड हैं और प्रत्येक ब्रह्माण्ड के पृथक २ हरि, हर और ब्रह्मा हैं। प्रत्येक ब्रह्मा जितनी शक्ति अपने

ब्रह्माण्ड को बनाने में खर्च करता है, वह सब अनन्तशक्ति का अति स्वल्प भाग है, अर्थात दो एक कण के ही तुल्य है। क्योंकि अनन्त वस्तु कभी सान्त (Limited) नही होती, यह बात प्रत्यक्ष देखने में आती है। एक वट के बीज में कितना बडा वृक्ष निहित है, इतना ही नहीं प्रत्येक बीज में अपने जैसे बीज असंख्यों की गिनती में बनाने की शक्ति रहती है। अर्थात प्रत्येक बीज में अनन्तशक्ति भरी हुई है। अणुबम का चमत्कारी प्रभाव अब सबको विदित है। न जाने एक-एक अणु से क्या-क्या हो सकता है। परमात्मा की अनन्त शक्ति, अणु-अणु में अनन्त ही परिपूर्ण है। अनन्त भण्डार से प्रवाहित शक्ति सक्रिय (dynamic) होकर अनन्त कार्य करके भी समाप्त नही होती, वरन अनन्त ही बच रहती है। यदि सब समाप्त हो जाय, तो वह अनंत पद वाच्य