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सौन्दर्यलहरी (आदि शङ्कराचार्य - सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित)

सौन्दर्यलहरी (आदि शङ्कराचार्य - सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित)

Soundarya Lahari of Shankaracharya Hindi

श्रीमदादि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Soundarya Lahari with Shlokas, Yantras & Hindi Commentary (उद्गम)

DevanagariHindipublished415 पृष्ठ

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सौंदर्य लहरी ⁠ ⁠ ⁠ ⁠ ⁠ ⁠ ⁠ ⁠ ⁠ ⁠ ⁠ ⁠ ⁠ ⁠ ⁠ ⁠ ⁠ ⁠ ⁠ ⁠ ⁠ ⁠ ⁠ ⁠ ⁠ ⁠ ⁠ ⁠ ⁠ ⁠ ⁠ ⁠ ⁠ ⁠ ⁠ ⁠ ⁠ ⁠ ⁠ ⁠ ⁠ ⁠ ⁠ ⁠ ⁠ ⁠ ⁠ ⁠ ⁠ ⁠ ⁠ ⁠ ⁠ ⁠ ⁠ ⁠ ⁠ ⁠ ⁠ ⁠ ⁠ ⁠ ⁠ ⁠ ⁠ ⁠ ⁠ ६५


“ अग्निरिति भस्म, वायुरिति भस्म, जलमिति भस्म, स्थलमिति भस्म, व्योमेति भस्म, देवा भस्म, ऋषयो भस्म, सर्वे ह वा एतदिदं भस्म, भूतं पावनं नमामि सद्यः समस्ताध शासकम् ! ”

श्लोक में ‘पांसु’, ‘एनं’ शब्दों में एकवचन का प्रयोग किया गया है, न कि बहुवचन का । इसका अभिप्राय यह भी हो सकता है कि प्रत्येक अणु में भगवती के चरण हैं ।

वह है विश्वतश्चक्षुरुत विश्वतोमुखी विश्वतोहस्ता उत विश्वतस्पात् ॥

अर्थात प्रत्येक परमाणु अनन्त शक्ति से परिपूर्ण है ।

तीसरे श्लोक में यह बताया गया है, कि भगवती की उपासना मुमुक्षुओं के अज्ञान का नाश करती है और सकाम उपासकों की सब कामनायें पूर्ण करती हैं । अर्थात भगवती भुक्ति और मुक्ति दोनों प्रदान करती है ।

[ ३ ]

अविद्यानामन्त स्तिमिर मिहिरोद्दीपन¹करी
जडानां चैतन्यस्तवकमकरन्दस्रुतिझरी ।
दरिद्राणां चिन्तामणिगुणनिका जन्म जलधौ
निमग्नानां दंष्ट्रा मुररिपुवराहस्य भवती ॥

१. पाठान्तर:-( द्वीप नगरी )