सौन्दर्यलहरी (आदि शङ्कराचार्य - सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित)
Soundarya Lahari of Shankaracharya Hindi
श्रीमदादि शङ्कराचार्य द्वारा
स्रोत: Soundarya Lahari with Shlokas, Yantras & Hindi Commentary (उद्गम)
पृष्ठ 124, कुल 415 में से
संदर्भ में पढ़ें८४ सौंदर्य लहरी
के कारण सत्वगुण का वह बाधक भी है । रति उसकी पत्नि है । दोनों का रूप अति सुन्दर है, परन्तु काम देव का शरीर तो इतना सुन्दर है कि रति भी उसके रूप का अपने नेत्रों से सदा चुम्बन किया करती है, अथवा दृष्टि रूपी जिव्हा से उसके रूप का रसास्वाद लिया करती है । कामदेव का सामर्थ्य भी इतना अधिक है कि बड़े-बड़े मुनियों के चित्त को भी क्षुब्ध कर देता है । यह सब भगवती की उपासना का ही फल है, क्योंकि कादि विद्या की उपासना से रूप लावण्य सहित सब ही सिद्धियों की प्राप्ति होती है । ब्लैं रति का मंत्र है व् और ल् उसके नेत्र हैं और ए शक्ति रूप है । उपरोक्त श्लोकोक्त वपुषा पद से व्. 'लेह्येत' पद से ले और 'महतां मुनिनाम्' पद से अनुस्वार लेकर उक्त बीज का उद्धरण किया जाता है, माया बीज और काम बीज के योग से अच्युतानन्द स्वामी ने इस श्लोक से 'ह्रीं क्लीं ब्लैं' इस साध्य-सिद्ध मंत्र का उद्धार किया है । इस मंत्र से हृदय चक्र और महानाद् के ऊपर शक्ति का न्यास किया जाता है । इसका फल सर्व सौभाग्य की प्राप्ति है जैसा कि 'प्रणत जन सौभाग्य जननीं पद से स्पष्ट है ।
अगले श्लोक में कामदेव के सामर्थ्य का वर्णन है ।
( ६ )
धनुः पौष्पं मौर्वी मधुकर मयी पंचविशिखा वसंतः सामन्तो मलयमरुदायोधनरथः ।