भारतकोश
सौन्दर्यलहरी (आदि शङ्कराचार्य - सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित)

सौन्दर्यलहरी (आदि शङ्कराचार्य - सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित)

Soundarya Lahari of Shankaracharya Hindi

श्रीमदादि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Soundarya Lahari with Shlokas, Yantras & Hindi Commentary (उद्गम)

DevanagariHindipublished415 पृष्ठ

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## सौंदर्य लहरी

तथाप्येकः सर्वं हिमगिरिसुते ! कामपि कृपा—  
मपाङ्गात्ते लब्ध्वा जगदिदमसंगो विजयते ॥

**क्लिष्ट शब्दार्थः—** विशिख = बाण, मौर्वी = रस्सी, अपांग = कटाक्ष ।

**अर्थः—** धनुष्य पुष्पों का बना है, उसकी रस्सी (ज्या) भौरों की बनी है, शब्द स्पर्श रूप रस गंध पांच विषय उसके बाण हैं, वसन्त ऋतु उसका योद्धा सामन्त है, मलयागिरि का शीतल मंद सुगंधित पवन उसका युद्ध में बैठने का रथ है और वह स्वयं अनंग (शरीर रहित) है, ऐसा कामदेव ऐसे शस्त्रों को लेकर सारे जगत को अकेला जीत लेता है । हे हिमगिरि सुते ! यह सामर्थ्य केवल तेरे कटाक्ष से कुछ थोडी सी ही कृपा प्राप्त करने का फल है ।

**सं. टिः—** इस श्लोक से काम बीज क्लीं का उद्धरण किया जाता है, काम से क कार, मलय से ल कार, मौर्वी से ई और पौष्पं से अनुस्वार लेना चाहिये ।

काम देव अनंग है, शंकर ने उसका देह भस्म कर दिया था ।

| काम दहन आख्यान | दक्ष प्रजापति के यज्ञ में अपने पति का अपमान न सहन करने के कारण सती ने अपना देह योगाग्नि से भस्म कर दिया था । ठीक ही तो |
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है, शिव द्रोही,